जय मम्मी दी फिल्म रिव्यू :हंसाने में नाकाम रही सनी सिंह और सोनाली सहगल की जोड़ी


जय मम्मी दी फ़िल्म यह कहानी मिसेस लाली खन्ना (सुप्रिया पाठक कपूर) और मिसेस पिंकी भल्ला (पूनम ढिल्लन) की है इन दोनों का परिवार दिल्ली के एक इलाके में अगल-बगल रहता है ये दोनों कभी अच्छी सहेलिया थी लेकिन आज कल दोनों के रिश्तो में प्यार की जगह नफरत ने ले ली है जिसका खामियाजा उनके दोनों बच्चे पुनीत खन्ना(सनी सिंह)  और सांझ भल्ला (सोनाली सहगल) उठाते है।  
दोनों एक दुसरे से प्यार करते है लेकिन दोनों मम्मियो की वजह से शादी नहीं कर पा रहे है आखिर वो ऐसा क्या करेंगे ?की दोनों मम्मियो की दुश्मनी प्यार में बदल सके और क्या वो अपने रिश्तो को शादी के अटूट बंधन में बांध पाएंगे इसी पे आधारित है ये फिल्म जय मम्मी दी। 

वैसे तो ये फिल्म कॉमेडी बेस्ड फॅमिली ड्रामा है लेकिन आप फिल्म में कॉमेडी के छण खोजते रह जायेंगे क्यूंकि ये फिल्म आपको कही पे भी हँसाने वाली तो नहीं है सनी सिंह और सोनाली सयगल फिल्म में औसत एक्टिंग की है और ना ही सुप्रिया पाठक कपूर- पूनम ढिल्लन अपने अभिनय की कोई छाप छोड़ पाई है। 


जय मम्मी दी (Jay Mummy di) Film Over-All Review: 👍👍

जय मम्मी दी फिल्म रिव्यू :हंसाने में नाकाम रही सनी सिंह और सोनाली सहगल की जोड़ी


Jai Mummy di Film Duration & Cast and Crew

Release date - 17 January 2020
Film Duration: 2 hr 05 min (125min)
Genre-Romantic Comedy
Cast (कास्ट): सनी सिंह,सोनाली सहगल,पूनम ढिल्लन,सुप्रिया पाठक,शिवानी सैनी,आलोकनाथ,शरत सक्सेना,वीर राजवंत
Director (निर्देशक): नवजोत गुलाटी


जय मम्मी दी फिल्म रिव्यू (Jai Mummy di Film Review)


जय मम्मी दी कॉमेडी बेस्ड फिल्म है लेकिन पूरी फिल्म में आप एक –आद जगह ही थोडा सा हंस पाएंगे।फिल्म की बे सिर पैर की कहानी जिसका स्क्रीन प्ले भी इतना सपाट है की फिल्म का अंत आपको पहले से ही पता लग जाता है। फिल्म में सनी सिंह सोनाली सहगल सुप्रिया पाठक कपूर और पूनम ढिल्लन जैसे मझे हुए कलाकार होते भी फिल्म कही पे भी आपको पूरी फिल्म  देखने के लिए मजबूर नहीं करती है। आप चाहे तो हाल से बहार आ जाये और थोड़ी देर बाद वापस जाकर बैठ जाये आपको कहानी जस की तस देखने को मिलेगी। फिल्म की कहानी हद से जाएदा लचर है और उतना ही ख़राब स्क्रीन प्ले है और संवाद पे भी कोई अच्छा खासा काम नहीं दीखता है। 

फिल्म का म्यूजिक की बात करे तो वो भी कोई  ख़ास नहीं है। बस दो गाने को छोड़ “मम्मी नू पसंद नहीं तू” जिसे सुनंदा शर्मा ने गाया है और दूसरा गाना "लेम्बोर्गिनी" जिसे नेहा कक्कड़, जस्सी गिल ने गाया है जिसे हम पहले भी सुन चुके है और "दरियागंज" जिसे अरिजीत सिंह, ध्वनि भानुशालीने गाया है वो कानो को सुनने में तो अच्छा लगता है लेकिन बहार आकर आप भूल जाते है।  


जय मम्मी दी फिल्म की कहानी (Jai Mummy di Film Story)


फ़िल्म की शुरुआत दिल्ली में पर्टी से होती है जहाँ मिस भल्ला और मिस खन्ना के परिवार के बीच लड़ाई से होती है
यहाँ से फ़िल्म में ये दिखाया गया है कि दोनों परिवारों के बीच कितनी कट्टर दुश्मनी है खास तौर पर मिसेस लाली खन्ना (सुप्रिया पाठक कपूर) और मिसेस पिंकी भल्ला (पूनम ढिल्लन) दोनों कोई भी मौका नहीं छोडती एक दुसरे को नीचा दिखने में ऐसा नहीं की दोनों हमेशा से ऐसी थी ये दोनों कभी अच्छी सहेलियाँ हुआ करती थी-थी और एक ही कॉलेज में भी पड़ती थी लेकिन अब एक दूसरे की शक्ल भी देखना नहीं चाहती है इन दोनों के बीच क्या हुआ ये कोई नहीं जनता जिसे फ़िल्म के अंत में दिखया गया है खैर आगे चलते है। 

इन दोनों की दुश्मनी से जुदा मिसेस लाली खन्ना का लड़का पुनीत खन्ना (सनी सिंह) और मिसेस पिंकी भल्ला की लड़की सांझ भल्ला (सोनाली सहगल) एक ही कॉलेज में पढ़ते है और एक दूसरे को प्यार करते है लेकिन वह दोनों अपनी मम्मियो के सामने एक दुसरे से नफरत करेने का नाटक करते है। 

एक दिन कॉलेज के फैरवेल पार्टी में सांझ (सोनाली सहगल) पुनीत (सनी सिंह) को शादी का प्रपोज कर देती है लेकिन पुनीत कोई जवाब दिए बिना वाह से चला जाता है यहाँ से दोनों के बीच दूरियाँ बढ़ने लगती है और जिसका कारण है दोनों की मम्मियाँ के बीच दुश्मनी जिस कारण दोनों के बीच दूरियाँ बढ़ने लगती हैं और इसी बीच दोनों की मम्मियाँ एक दूसरे का रिश्ता तय कर देते हैं इसके बाद पुनीत अपने किये की गलती मानता है और सांझ को मिलने के लिए कहता है जहाँ वह अपने दिल की बात कहता है कि वह उससे शादी करना चाहता है लेकिन यहाँ सवाल ये खड़ा हो जाता है कि दोनों के घरो में शादी की तैयारिया चल रही है अब हम कैसे अपनी मम्मियो को समझायेंगे?

एक दिन पुनीत (सनी सिंह) और सांझ (सोनाली सहगल) कोर्ट में शादी करने का फैसला करते है लेकिन कोर्ट पहुच कर वह दोनों शादी नहीं कर पाते और अपने-अपने घर वापस चले जाते है पूरी फ़िल्म की कहानी इसी दोनों की दुश्मनी और उनके बच्चो के प्यार पर आधारित है। 

क्या पुनीत और साँझ मिसेस लाली खन्ना (सुप्रिया पाठक कपूर) और मिसेस पिंकी भल्ला (पूनम ढिल्लन) को अपनी शादी के लिए राज़ी कर पाएंगे? क्या मिसेस लाली खन्ना (सुप्रिया पाठक कपूर) और मिसेस पिंकी भल्ला (पूनम ढिल्लन) के दोनों के बीच दुश्मनी दोस्ती में बदल पायेगी? आखिर क्या है दोनों की दुश्मनी का राज़ इसे देखने के लिए आपको जय मम्मी दी देखनी पड़ेगी। 

जय मम्मी दी फिल्म में अभिनय विभाग(Jai Mummy di Film Acting Department)


सनी सिंह लव रंजन के निर्देशन में बनी फिल्म प्यार का पंचनामा 2 में दिखे थे इसके बाद उनके करियर का ग्राफ ऊपर चढ़ा है जिसके बाद उनके हाथ सोनू की स्वीटी जैसे सफल फिल्म उनके झोली में आई है लेकिन उन फिल्म में सनी जैसे दिखे है वैसे वो इस फिल्म में दिखे है उनकी एक्टिंग में ज़रा सा भी अन्तर करना मुश्किल नहीं है उन्हें अभी अपने अभिनय पे और काम करना पड़ेगा वो कही पे भी अपनी छाप नहीं छोड़ते है। 

सोनाली सहगल इस फिल्म ग्लैमरस तो लगी है लेकिन खली ग्लैमरस लगने से काम नहीं बनता आपको अपने किरदार को पकड़ के चलना पड़ता है  जो शायद सोनाली कर नहीं पायी है खास तौर पे सनी सिंह के साथ जो केमिस्ट्री प्यार का पंचनामा 2 देखने को मिली वो इस फिल्म में नदारत थी। 

पूनम ढिल्लन और सुप्रिया पाठक कपूर के किरदारों को जितना स्ट्रोंग बताया गया है उतना ही उनसे उम्मीद थी की दोनों मंझे अदकारो की अदाकारी देखने को मिलेगी लेकिन यहाँ पर भी निराशा मिलती है इस फिल्म में दोनों को मोगम्बो और गब्बर के नाम से नवाज़ा गया है लेकिन वो रोब देखनेको नहीं मिलता जब की  फिल्म का नाम ही जय मम्मी दी और पूरी फिल्म पूनम ढिल्लन और सुप्रिया पाठक कपूर के कंधो पे थी लेकिन दोनों अभिनेत्रियों का अनुभव मेलोड्रामा की भेट चढ़ गया।  


👍 निर्देशक (Jay Mummy di Film Director)


अगर फिल्म रोमांटिक कॉमेडी हो और फिल्म में किसी भी द्रश्य में हँसी ना आये तो इसका टिकरा निर्देशक के ही ऊपर जायेगा लव फिल्म्स ने पहले भी अच्छी फिल्मे दी है। जिसको लव रंजन ने खुद निर्देशित किया था। लेकिन इस फिल्म का निर्देशन नवजोत गुलाटी ने किया है जो पूरी तरह से नाकामयाब रहे। जय मम्मी दी फिल्म हँसाने की बजाये निराश करती है। निर्देशक नवजोत गुलाटी  फिल्म के किरदारों से सही ढंग से उनका हुनर स्क्रीन पे ला नहीं पाए। जबकि मझे हुए एक्टर की भरमार थी जैसे सनी सिंह,सोनाली सहगल,पूनम ढिल्लन और सुप्रिया पाठक इनके पास वो दम है की ये किरदारों में जान डाल सकते है लेकिन कहानी और निर्देशन में कमी साफ झलकती है 

फिल्म की कहानी में किरदारों को सही तरह से मांझा नहीं गया है और नाही फिल्म की कहानी पे काम किया है मतलब की फिल्म रोमांटिक कॉमेडी जॉर्नर की होते हुए भी ना तो पूरी तरह से रोमांटिक बनी ना ही कॉमेडी इसीलिए कहते है कि कॉमिडी इज वैरी सीरियस बिजनस। वाकई कॉमिडी हर किसी के बस की बात नहीं।जिसमे नवजोत गुलाटी असफल हुए है। 

👉क्यूँ देखे :  अगर आपके पास फालतू टाइम हो और कुछ नहीं है करने को तो २ घंटा ये फिल्म झेल सकते है तो ये फिल आपके लिए है। लेकिन सिरदर्द की दवाई साथ ले जाये शायद ज़रूरत पड़ जाये।

👉क्यूँ न देखे : ऐसा कोई ज़रोरी नहीं की ये फिल्म देखे अगर नहीं देखेंगे इसमें कोई हर्ज़ नहीं है आपको ये फिल्म नेट फ्लिक्स या अन्यडिजिटल प्लेटफार्म में कुछ दिन बाद देखने को मिल जाएगी। 

👉आपको मेरा द्वारा दिया गया फिल्म रिव्यु कैसा लगा आप मुझे  कमेन्ट  बॉक्स में लिख सकते है और अपने सुझाव भी दे सकते है  



Jai Mummy di Film Official trailer and download