इतिहास में दर्ज़ तानाजी मालुसरे के बलिदान को अजय देवगन ने पर्दे पर जीवंत किया।

तानाजी: द अनसंग वॉरियर फिल्म 17 वीं शताब्दी के मराठा साम्राज्य के जाबाज़ मराठा योद्धा तानाजी मालुसरे की वीरता और युद्ध कौशल की गाथा पे आधारित है। जिसे परदे पे अपनी अदाकारी से अजय देवगन ने तानाजी मालुसरे को परदे पे जीवंत कर दिया है। इस फिल्म की पठकथा कोंधना किले को मुग़ल साम्राज्य के हाथो से वापस लेने पे आधारित है। जिस युद्ध में तानाजी मालुसरे जैसे महान योद्धा को मराठाओ ने खो दिया था। 

इतिहास में दर्ज़ तानाजी मालुसरे  के बलिदान को अजय देवगन ने पर्दे पर जीवंत किया।

Tanhaji: The Unsung Warrior' 
Film Duration & Cast and Crew 

Release date - 10 January 2020
Film Duration: 2 hr 15 min (135 min)
Genre-Action, Drama, Historical Period 
Cast (कास्ट): अजय देवगन (Ajay devgan), सैफ अली खान (Saif Ali khan), काजोल(Kajol), शरद केलकर (Sharad kelkar),नेहा शर्मा(Neha Sharma)
Director (निर्देशक): ओम राउत (Om Raut)
Producer (निर्माता): Ajay Devgan,Bhushan Kumar, Krishan Kumar
Story Screenplay (स्टोरी स्क्रीनप्ले): Prakash Kapadia,Om Raut
Dialogues (संवाद): Prakash Kapadia
Lyrics (गीत): Swanand Kirkire
Music (संगीत): Ajay Gogavale,Atul Gogavale,Sachet-Parampara
Cinematographer (छायाकार): Keiko Nakahara
Rating (रेटिंग):  3.5⭐स्टार (में से)
Experience (अनुभव): 👌👌👌👌


तानाजी: द अनसंग वॉरियर मूवी रिव्यु (Tanhaji: The Unsung Warrior Full movie Review)


मराठाओ की वीरगाथाओ पे साल २०१९ में भी एक फिल्म आई थी पानीपत जिसे आशुतोष गोवारिकर ने निर्देशित किया था। लेकिन वो फिल्म दर्शको के दिल में जगह ना बना पाई। उसकी खास वजह थी उसका लचर और भोझिल स्क्रीनप्ले और निर्देशन |

लेकिन तनाजी: द अनसंग वॉरियर फिल्म इसके उलट है, ये फिल्म आपको अंत तक बंधे रखती है भले ही इस फिल्म की कहानी भी युद्ध के इर्द-गिर्द घुमती है।  लेकिन ओम राउत का निर्देशन और इस फिल्म टाईट स्क्रीनप्ले इसे अंत तक देखने लायक बनता है।अजय देवगन(तनाजी मालुसरे) और सैफ अली खान(उदयभान राठौड़)का अभिनय बेहद उन्दा है। जिस कारण आप सीट से बंधे रहते है। 

ये फिल्म 3D में भी रिलीज़ हुई है जिसका टेक्निकल पहलु हॉलीवुड फिल्मो की अपेक्षा थोडा कमतर है लेकिन जितना भी है वो फिल्म को भव्य लुक बढ़ाने में कामयाब होता है ओवर आल फिल्म देखने लायक है  जहाँ अच्छे संवाद,कहानी,स्क्रीनप्ले ,अभिनय और अच्छे एक्शन देखने को मिलेगे।

तानाजी: द अनसंग वॉरियर मूवी की कहानी (Tanhaji: The Unsung Warrior Film Story)


फिल्म की शुरुवात में तन्हाजी अपने पिता से युद्ध कौशल सीख रहे है और उनके पिता को युद्ध भूमि में जाना पड़ता है जहाँ वो तन्हाजी को इस मिट्टी की रक्षा करने के लिए कहकर वीरगति को प्राप्त हो जाते है|

फिल्म में इतिहास का वो दौर दिखाया है जब औरंगजेब मुगलिया सल्तनत का परचम उत्तर में लहराने के बाद और वो पुरे हिन्दुतान में अपना परचम लहराने का मनसूबे को अंजाम की योजना बना राह है लेकिन दक्खन (दक्षिण) में रास्ते का रोड़ा शिवाजी महाराज (शरद केलकर) के नेतृत्व मराठाये सेना बनी हुई है और वो अपने स्वराज्य को लेकर ली गई कसम के प्रति कटिबद्ध है। फिल्म की कहानी में जिस युद्ध का चित्रण किया है वो  इतिहास में यह युद्ध (4 फरवरी 1670) को सिंहगढ़ का युद्ध के नाम से दर्ज है|

17वीं शताब्दी में शिवाजी महाराज और मुगलों के बीच पुरंदर संधि हुई थी जिसमे कोंडाणा किले समेत 23 किलों को मुगलों के हवाले हो गए थे लेकिन जिस वक़्त कोंडाणा किले पे मुग़ल अपना कब्ज़ा लेने आये थे उस वक़्त किले में राजमाता जीजाबाई मौजूद थी जिन्हें मुग़ल सरदार ने बेइज्जत कर वहा से बहार का रास्ता दिखया था उसी वक़्त राजमाता जीजाबाई ने शपथ ली थी कि जब तक इस किले पर दोबारा भगवा नहीं लहराएगा, तब तक वे चरण पादुका नहीं पहनेंगी। 

इसके बावजूद मुगलिया सल्तनत की प्यास नहीं मिटी है। इसके बाद औरंगजेब कोंडाणा को दक्खन (दक्षिण) की राजधानी के मनसूबे को पूरा करने के लिए अपने खास, विश्वासपात्र और बर्बर सूबेदार उदयभान राठौड़ (सैफ अली) को भारी-भरकम सेना और नागिन नामक एक बड़ी तोप के साथ कोंडाणा किले की और कूच करने का आदेश देकर मराठा साम्राज्य का खात्मा करने के इरादे से भेजता है।

इन सब से अनभिग शिवाजी महाराजे के परममित्र और जांबाज योद्धा सूबेदार तानाजी मालसुरे (अजय देवगन) अपनी पत्नी सावित्रीबाई (काजोल) के साथ अपने बेटे की शादी की तयारियों में व्यस्त हैं।

शिवाजी महाराज अपने बहादुर और प्यारे दोस्त को इस वक्त युद्ध की त्रासदी में शामिल नहीं करना चाहते, वो इसलिए कि वह नहीं चाहते कि तानाजी के शादी वाले घर में युद्ध का ग्रहण लगे। मगर जब तानाजी को पता चलता है कि स्वराज्य और शिवाजी महाराज खतरे में है, तो वह बेटे की शादी की परवाह किए बगैर भगवा पहनकर उदयभानु का सर कलम करने को निकल पड़ता है।

उदयभानु जांबाजी में तानाजी से कहीं कमतर नहीं है और उसमें बर्बरता भी भरी हुई है। इसी प्रवृत्ति के तहत वह विधवा राजकुमारी कमलादेवी (नेहा शर्मा) को उठा लाता है और अपनी रानी बनाने पर अड़ जाता है। असल में कमला उसका पहला प्यार थी, मगर उसके द्वारा ठुकराए जाने और लज्जित किए जाने के बाद वह मुगलों से जा मिला। उदयभानु राठोड के साथ हुए युद्ध में तानाजी को शौर्यता के साथ-साथ विश्वासघात भी मिलता है। क्या तानाजी उदयभानु का खात्मा कर पाता है? क्या वह शिवाजी महाराज को दिए गए वचन का पालन कर पाता है? इसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

तानाजी: द अनसंग वॉरियर मूवी में अभिनय विभाग(Tanhaji: The Unsung Warrior Film Acting Department)



अजय देवगन (Ajay Devgan)

तानाजी: द अनसंग वॉरियर फिल्म अजय देवगन के करियर की ये 100वी फिल्म है।  इसी लिए इस फिल्म में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी है। तानाजी मालुसरे के रोल में अजय देवगन की मेहनत स्क्रीन पे दिखती है उनको स्क्रीन पे देख कर एक बार तो महसुसू होता है की तानाजी हुबहू इसी तरह से दीखते होंगे। 


अजय ने उनकी हाव-भाव और उनके जोश को परदे पे जीवंत कर दिया है उनको स्क्रीन पे देखना अच्छा लगता है।खासकर युद्ध के दृश्यों में उनकी चपलता देखते बनती है।और स्वराज्य के लिए उनका मर-मिटनेवाला ज़ज्बा उनके चरित्र को खास बनाता है जिसे आप सिनेमा हाल में महसुसू कर सकेगे।  


सैफ अली खान 

सैफ अली खान ने भी अपने किरदार से पूरा न्याय किया है उदयभान राठौर के किरदार में सैफ ने क्रूरता और बर्बरता के साथ थोड़ा सा जो ह्यूमर का तड़का(ब्लैक हुयूमर) दिया है जैसे दूसरों को प्रताड़ित करते हुए आसुरी आंनद की प्राप्ति करनेवाले दृश्यों में उनकी ब्लैक कॉमिडी भी नजर आती है। 

इससे वो स्क्रीन पे अजय देवगन से थोडा अधिक आकर्षित करते है या यूँ कहले की तानाजी फिल्म में खलनायक बेहद मजबूत है इसके बावजूद वो परदे पे बिलकुल नेचुरल लगे है। 

काजोल देवगन (Kajol Devgan)

काजोल के पास फिल्म में भले ही कम सीन आये है लेकिन वो हर सीन में अपनी छाप छोडती है चाहे अजय के साथ उनकी रोमांटिक सीन्स हो या इमोशनल सीन्स वो हर हर जगह अपना 100 प्रतिशत देती है। 


शरद केलकर(Sharad Kelkar)

शरद केलकर शिवाजी महाराजे के रोल में काफी अछे लगे है और उन्होंने भी अपने रोल के साथ न्याय किया है लेकिन कही न कही उनको परदे पे देखकर  थोड़ी सी कमी नजर आती है जैसे शिवाजी महाराजे की कद काठी और हव-भाव जिसपे वो और कम कर सकते थे।   



 निर्देशक (Tanhaji: The Unsung Warrior Movie Director) 


डायरेक्टर ओम राउत तानाजी से पहले लोकमान्य एक युग पुरुष जैसी ऐतिहासिक फिल्म दे चुके है जिसमे उनको बेस्ट डायरेक्टर का फिल्फेयर अवॉर्ड भी मिल चूका है| और इस बार ओम राउत ने इतिहास के पन्नो में दर्ज़ महान जाबाज़ योद्धा तानाजी मालुसरे को दर्शको को सामने पेश किया है|

जिसमे वो सब कुछ डाला है जिसे दर्शक देखना चाहेंगे तानाजी फिल्म की कहानी के साथ वीएफएक्स पर भी अच्छा खासी  मेहनत की गयी है। जिससे फिल्म की ग्रिप बनी रहे|

3D में युद्ध के द्रश्य देखते ही बनते है कुल मिलकर ओम राउत दर्शको को अंत तक बाँधने में कामयाब होते है क्युकी फिल्म में एक्शन सीक्वेंस भी काफी उम्दा है जिसे मराठा की छापमार युद्ध तकनीक को ध्यान में रखते हुए उस दौर के वॉर सीन्स को डिजाइन किया, जो काफी रोचक और थ्रिलिंग हैं। किलों और घाटी को विजुअल इफेक्ट्स से अच्छी तरह सजाया गया है।


फिल्म में अगर संगीत की बात करें, तो सचेत परंपरा, अजय-अतुल और मेहुल व्यास जैसे संगीतकारों की मौजूदगी में 'शंकरा रे शंकरा', 'माय भवानी' और 'घमंड कर' जैसे गाने स्क्रीन पर देखने में अच्छे लगते है जिनकी कोरियोग्राफी भी काफी अच्छी लगती है। 

👉क्यूँ देखे :  अगर इतिहास पे बनी फिल्मो के शौकिन है और उसे 3D में अनुभव करना चहाते है तो ये फिल्म आपके लिए है जहाँ आपको अजय-सैफ और काजोल का  दमदार परफॉर्मेंस देखना को भी मिलेगा ।

👉क्यूँ न देखे : फिल्म को ना देखने की कोई ख़ास वजह तो नहीं है हाँ अगर आप हलकी फुलकी फिल्म देखते है तो ये फिल्म आपके लिए नहीं है मगर आपको ये फिल्म एक बार देखनी चाहिए


👉आपको मेरा द्वारा दिया गया फिल्म रिव्यु कैसा लगा आप मुझे  कमेन्ट  बॉक्स में लिख सकते है और अपने सुझाव भी दे सकते है  


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