साधारण कहानी लेकिन कंगना और जस्सी गिल का सशक्त अभिनय [PANGA FILM REVIEW]

पंगा फ़िल्म रिव्यु, एक माँ को फिर से अपने सपनो को दूसरा मौका देने की कहानी बयाँ करती है। कंगना रानौत और जस्सी गिल के दमदार अभिनय ने एक साधारण-सी कहानी को अंत तक देखने लायक बना दिया। आप चाह कर भी अपनी-अपनी सीट नहीं छोड़ पाएंगे। 


साधारण कहानी लेकिन कंगना और जस्सी गिल का सशक्त अभिनय  [PANGA FILM REVIEW]

पंगा फ़िल्म शादी शुदा जया निगम की कहानी कहती जो कभी इंडियन महिला कब्बडी टीम की कप्तान हुआ करती थी, लेकिन बच्चे की जिमेदारी के बाद उन्होंने कब्बडी को छोड़ दिया। लेकिन फिर से वह कब्बडी में कैसे कमबैक करती है?और कैसे अपने सपनो को दुबारा पूरा करती है? इसी कहानी को बयाँ करती है पंगा। 

PANGA Film Duration & Cast and Crew

Release date-24 January 2020

Film Duration: 2 Hr 09min (129 min)

Genre- Drama/Sport

Cast (कास्ट): कंगना रानौतजस्सी गिलऋचा चड्ढा,नीना गुप्तायज्ञ भसीन

Director (निर्देशक): अश्विनी अय्यर तिवारी

Producer (निर्माता): फॉक्स स्टार स्टूडियो( Fox Star Studios)

Story Screenplay (स्टोरी स्क्रीनप्ले): निखिल मेहरोत्रा और अश्विनी अय्यर तिवारी

Additional Screenplay & Dialogues (अतिरिक्त पटकथा और संवाद):नितेश तिवारी द्वारा

Music (संगीत) : शंकर एहसान लॉय (Shankar Ehsaan Loy)

Cinematographer (छायाकार): Jay I. Patel

Rating (रेटिंग): स्टार (में से)

Experience (अनुभव) : 👌👌👌👌


 पंगा मूवी रिव्यु (PANGA Full movie Review)


शादी के बाद एक माँ अपने सपनो को कैसे त्याग देती है और मन ही मन में अपने सपनो को-को भूल कर घरबार और नौकरी के चक्कर में अपने अस्तित्व खो कर रोज़ वह कैसे अपने अतीत से सामना करती है। इसी कहानी को निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी ने स्क्रीन पर बखूबी ढंग से कहा है। 


साधारण-सी स्टोरी और सपाट स्क्रीन प्ले होते हुए भी कंगना रानौत और जस्सी गिल ने अपने अभिनय से पंगा फ़िल्म में जान डाल दी है और फ़िल्म में 7 साल के बच्चे का किरदार निभा रहे यज्ञ भसीन ने भी अपनी अभिनय से सबको बांधे रखा है। 


कुल मिलकर पंगा फ़िल्म में काफ़ी अच्छी है। जिसे जिसमे वह जया निगम की कहानी कहती है जो 32 साल की उम्र में फिर से अपने सपनो को जीने के सफ़र पर निकलती है और कब्बड़ी के मैदान पर वापसी करती है। जिस कारण उसकी फैमली लाइफ तमाम मुश्किलों से गुजरती है।


लेकिन क्या वह अंत में अपने सपनो को पाने में कामयाब हो पाती है? क्या वह हार मान कर वापस चली जाएगी? क्या फैमली, करियर और कब्बडी के बीच वह कैसे सामंजस्य बैठा पायेगी? जिसे फ़िल्म में मनोरंजक अंदाज़ से दिखया गया है कि जया निगम कैसे सपनो के लिए अपने आप से कैसे पंगा लेती है। 


फ़िल्म पंगा में कई ऐसे दृश्य है जिन्हें बड़े ही खूबसूरती से गढा गया है जो जहन में छाप छोड़ते जिसे सिनेमाघर से बाहर आने पर भी याद रह जाते हैं। दमदार और चुटीले संवादों का धागा तो सभी कलाकारों को मिला ही हुआ है। फ़िल्म का पहला हाफ थोड़ा सुस्त है लेकिन आप जब तक फ़िल्म की कहानी से बंध जाते है लेकिन दूसरा भाग गतिशील है। 


शंकर-एहसान-लॉय (Shankar Ehsaan Loy) का संगीत और जावेद अख्तर के बोल कहानी के साथ सुसंगत हैं। फैमिली ड्रामा के रूप में यह रोचक फ़िल्म है, जो मनोरंजन करने के साथ-साथ अपने-अपने सपनों को न छोड़ने औरउन्हें दूसरा मौका देने की बात करती है। 


पंगा मूवी की कहानी ('PANGA ‘Film Story) 


फ़िल्म की कहानी शुरू होती है जहाँ जया निगम (कंगना रानौत) अपने पति प्रशांत (जस्सी गिल) और सात साल के बेटे आदि (यज्ञ भसीन) के साथ वह खुशहाल जीवन बिता रही है|जया भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन पर टिकेट विक्रेता काउंटर पर बैठती है लाइफ में सब कुछ ठीक चल रहा है| 


एक दिन आदि (यज्ञ भसीन) बीमार हो जाता है जिसको डाक्टर के पास ले जाने के कारण वह नौकरी पर लेट पहुचती है जिसके बाद उसका-उसका बॉस उसे फटकर लगता है और कहता है कि जाया आप रेलवे के लिए कब्बडी खेला करती थी अब नहीं अब अगर आपको छुट्टी लेनी है तो बता कर लेनी होगी यहाँ से पता चलता है कि जया कब्बडी की खिलाडी थी लेकिन अब उसने आपको अपनी नौकरी और बच्चे आदि (यज्ञ भसीन) पति प्रशांत (जस्सी गिल) के इर्द-गिर्द समेट लिया है। 


एक दिन आदि (यज्ञ भसीन) जया (कंगना रानौत) को स्कूल में होने वाले एनुअल डे (Annual day) की दौड़ में आने को कहता है लेकिन जया अपनी नौकरी के चलते नहीं पहुच पति है जिस कारण यज्ञ जया से नाराज़ हो जाता है| 

जिसके बाद प्रशांत यज्ञ को समझता है\और बताता जया ने हमारे लिए अपना सपना छोड़ दिया फ़िल्म यहाँ से फ़्लैश बेक में जाती है जहाँ जया कब्बडी की स्टारप्लेयर हुआ करती थी और इन्डियन महिला कब्बडी टीम की कप्तान भी थी लेकिन घरबार की जिम्मेदारी के बाद उसने इण्डिया के लिए गोल्ड मेडल लाने के सपने को छोड़ दिया था। 


इसके बाद बेटे और पति के प्रोत्साहन पर 32 साल की उम्र में जया मैदान पर वापसी करती है। उसकी यह डगर आसान नहीं होती। बढ़ा वजन, उम्र, घर-परिवार की जिम्मेदारी जैसी चिंताएँ उसके सामने होती हैं, लेकिन ' जो सपने देखते हैं वे पंगा लेते हैं। 


जया के सफर में उसकी बेस्ट फ्रेंड मीनू (रिचा चड्ढा) भी देश के लिए खेलने है के सपने में उसके साथ चट्टान की तरह खड़ी होती है। क्या जया अपने सपनो को साकार कर पायेगी? क्या वह इण्डिया महिला टीम का हिस्सा बन पायेगी? क्या 32 की उम्र में हार मान कर वह वापस लौट जाएगी? क्या इण्डिया महिला कब्बडी टीम गोल्ड मेडल ला पायेगी? इन्ही सब सवालो का जवाब देती है पंगा फ़िल्म। 


पंगा मूवी में अभिनय विभाग (PANGA' Film Acting Department) 

कंगना रानौत 

कंगना रानौत ने जया निगम  के किरदार को बड़ी शिद्दत और जरूरी भाव के साथपर्दे पर निभाया है। कबड्डी खिलाड़ी के तौर पर वह पर्दे पर विश्वसनीय नजरआती हैं। और उतनी एक माँ के रूप में वो अपना सशक्त अभिनय का प्रदर्शित करती है उन्होंने सही बैलेंस एक्टिंग की है जिस कारण वो स्क्रीन कंगना नहीं जया निगम  ही लगी है ये ही उनकी एक्टिंग की खासियत है जिस कारण फिल्म में आप फिल्म में बंधे रहते है 


जस्सी गिल

पंजाबी गायक और अभिनेता जस्सी गिल की यह पहली हिंदी फिल्म है। उनका सादगी भरा अंदाज काफ़ी प्रभावित करता हैं और कई जगह वो कुछ नहीं बोलते है फिर भी उनकी चहरे के भाव सब कुछ कह देते है और कंगना से कही भी कमतर नजर नहीं आये है भले ही ये फिल्म वीमेन सेंट्रिक थी लेकिन वो अपनी छाप छोड़ने में कामयाब होते है


बाल कलाकार यज्ञ भसीन विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उनकी मासूमियत और संवाद किरदार को स्मरणीय बनाते हैं।  कबड्डी कोच के रूप में रिचा चड्ढा काफ़ी जंचती हैं। उनके बिंदास अंदाज और संवाद अदायगी में ह्यूमर के साथ खेल के प्रति संजीदगी का भाव उभर कर सामने आता है। युवा खिलाड़ी के तौर पर मेघना बर्मन काफ़ी अच्छी लगी है। नीना गुप्ता की मौजूदगी भर से दृश्यों में निखार आ जाता है।हलाकि उनका रोल थोडा कम था लेकिन वो उसमे भी अपनी छाप छोडती है 

 

 निर्देशक (PANGA Movie Director) 


निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी महिलाओं से जुड़े पारिवारिक मुद्दे के समंज्य्स्य को दर्शाने में काफ़ी महारत रखती है जिस कारण से उनकी फ़िल्म में आपको महिलाओ की अकंशाओ और सपनो को फिर कैसे साकार करती है| यह देखने को मिलता है| 


जैसे नील बट्टे सन्नाटा में उन्होंने एक नौकरानी के अपने बेटी को अफसर बनाने की जद्दोजहद को दिखया है तो वही ' बरेली की बर्फी में छोटे शहर की एक आज़ाद ख्याल वाली लड़की की दिल की कहानी कही है। 


निखिल मल्होत्रा और अश्विनी अय्यर तिवारी द्वारा लिखित पंगा की कहानी में शादीशुदा खिलाड़ी के मैदान में वापसी के सफर में घर परिवार की दिक्कतों, सामाजिक सोच और खेल में वापसी के संघर्ष जैसे पहलुओं को उन्होंने बड़े ही खूबसूरती के साथ दिखाया है। 


फ़िल्म के मध्यांतर से पहले जया अपने पति को कहती है जब मैं तुम्हे देखती हूँ तो ख़ुशी होती है और जब अपने बेटे को देखती हूँ तो खुशी होती है लेकिन जब खुद को देखती हूँ तो वह खुशी नहीं मिलती यह जया की दी आकांक्षाओं को व्यक्त करता है। जो वाकई दिल को छु लेता है


इस फ़िल्म में 'दंगल' फ़िल्म के निर्देशक निवेश तिवारी को एडीशनल स्क्रीन का क्रेडिट दिया गया है। जो अश्विनी अय्यर तिवारी के पति भी हैं। जिनका योगदान इस तरह फ़िल्म में साफ झलकता है


👉क्यूँ देखे: भले ही फिल्म की कहानी आप को पहले से पता हो जाएगी लेकिन कंगना और जस्सी गिल के अभिनय का दमदार पर्फोमेंस फिल्म को अंत तक देखने लायक बनती है एक साफ सुथरी पारिवारिक फिल्म जिसे आप पुरे परिवार के साथ एन्जॉय कर सकते है 

👉क्यूँ न देखे: ऐसी कोई खास वजह नहीं है की फिल्म एक बार न देखि जाये लेकिन अगर कहानी में कुछ नया ढूँढना चाहते है तो ये फिल्म आपके लिए नहीं है 

👉आपको मेरा द्वारा दिया गया फ़िल्म रिव्यु कैसा लगा आप मुझे कमेन्ट बॉक्स में लिख सकते है और अपने सुझाव भी दे सकते है

 

Panga | Official Trailer | Kangana | Jassie | Richa | Dir: Ashwiny Iyer Tiwari |