रक्तांचल 80 के दशक में पूर्वांचल के टेंडर माफिया के बीच रक्तपात की कहानी है

Raktanchal web series review – पूर्वांचल में माफियाओं के बीच टेंडर और वर्चस्व के लिए 80 के दशक में बहुत रक्त पात हुआ था | उस समय पूर्वांचल की सत्य घटनाओ से प्रेरित होकर निर्देशक रिमल श्रीवास्तव के कहानी को इसी के इर्द गिर्द ही रखा है| इससे पहले भी माफियाओं के बीच जंग को ज़ी-5 की वेब सीरीज़ 'रंगबाजमें देख चुके है जो की उत्तर प्रदेश में फेमस हुए माफिया डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला की कहानी पे आधारित थी | तो वही, अमेज़न प्राइम वीडियो के मिर्जापुर में एक काल्पनिक कहानी दिखाई गई है|

रक्तांचल 80 के दशक में पूर्वांचल के टेंडर माफिया के बीच रक्तपात की कहानी है [रक्तांचल वेब सीरीज ]


हालांकिरक्तांचल की कहानी में पूर्वांचल के क्राइम को डीकोड करने की कोशिश की गयी है जो काफी हद तक सफल हो जाती अगर संवाद और विलेन वसीम खान बने निकितिन धीर के रोल को मजबूत किया होता क्यूंकि  रक्तांचल की कहानी ​​में विजय सिंह (क्रांति प्रकाश झा) के रोल को जाएदा तरजीह दी गयी है |


Raktanchal Web Series Review Duration & Cast and Crew
Release Date-28-May-2020
OTT – MX Original
Film Duration: 23-27min (Every episode)
Genre- Action, Crime, Drama series
Cast (कास्ट): निकितिन धीर, क्रांति प्रकाश झा, रोन्जिनी चक्रवर्ती, प्रमोद पाठक, विक्रम कोचर, सौंदर्या शर्मा 
Producer (निर्माता) - जतिन सेठी,पीयूष गुप्ता,शशांक राय,प्रदीप गुप्ता,महिमा गुप्ता
Director (निर्देशक): रिमल श्रीवास्तव
Writer (लेखक): सर्वेश उपाध्याय
Music (संगीत): मन्नान मुंजाल
Cinematographer (छायाकार): विजय मिश्रा

Rating (रेटिंग): 2 स्टार (में से)

#रक्तांचल वेब सीरीज रिव्यू (Raktanchal Web Series full Review)

रक्तांचल की अगर कहानी को देखे तो ये पूर्वांचल के दो बड़े माफिया मुख्तार अंसारी और ब्रजेश सिंह के गैंगवार के बीच हुए रक्तपात की सच्ची घटनाओं से प्रेरित होकर लिखी गयी है | अगर आप इन दो नामो से वाकिफ है तो इस सीरीज़ को देखकर अनुमान लगा लेंगे |क्यूंकि 80 के दशक में मुख्तार अंसारी और ब्रजेश सिंह के बीच आबकारी के ठेके से शुरु हुआ द्वन्द आगे चलकर रक्तपात में बदल गया था |जिससे पूरा पूर्वांचल दहल गया था | 

रक्तांचल को देख कर आप पूर्वांचल के उस दौर महसूस कर सकेगे | जब खासकर क्रूर टेंडर माफिया और सत्ता में अपनी हनक के चलते वसीम खान का आतंक का खौफ पूर्वांचल के हर कौने में था और किसी की  उस पर उंगली उठाने की हिम्मत नहीं हुआ करती थी लेकिन वसीम खान बने निकितिन धीर वो खौफ स्क्रीन पे पैदा नहीं कर पाए | (मुख्तार अंसारी का नाम सुन कर पूर्वांचल सबके पैर कांप जाते थे) लेखक सर्वेश उपाध्याय और निर्देशक रिमल श्रीवास्तव ने क्या सोच कर विलेन को कमज़ोर दिखाया ये समझ के परे है |

इसके उलट विजय सिंह का रोल काफी दमदार लिख गया है जिसे क्रांति प्रकाश झा अच्छे ढंग से निभाया है कुल मिलकर स्क्रिप्ट बैलेंस नहीं दिखती है |  

रक्तांचल की कहानी की बात करे तो ठीक ठाक है और किरदार इसमें रोमांच भर देते है लेकिन अगर इसे मिर्ज़ापुर से इसकी तुलना करे तो ये उससे थोड़ा कमतर है

ऐसा नहीं की सीरीज़ देखने लायक नहीं है लेकिन रंगबाज़ ,रंगबाज़ 2 और मिर्ज़ापुर की कहानी को देखे तो सभी कहानियो में आपको समानता ही नज़र आयेगी लेकिन उनके किरदारों को गढ़ने में काफी अच्छा काम किया गया है जो यहाँ हुआ नहीं |

 कहानी कई बार अपनी रफ्तार और दर्शकों की दिलचस्पी को तोड़ते हुए अनावश्यक रास्तो में भटक जाती है। फिर भी, रिदम ने यहां अपनी पूरी कोशिश की है। रिदिम श्रीवास्तव ने स्क्रीन पर नज़र बनाये रखने के लिए आइटम सांग और सौंदर्या शर्मा का सहारा लिया है जहाँ सौंदर्या शर्मा अपने रोल में अच्छा काम किया है| वो काफी हद तक पकड़ बनती भी है |

बात करे संवाद की जैसे एक जगह नेता विजय सिंह को कहता है “तुमने आज छाती चौड़ी कर दी” जिसके पलट में विजय जवाब देता है “छाती तो औरतो की होती है मैंने तो सीना तो मर्दों का होता है” संवाद अच्छा था और उम्मीद थी कुछ अच्छे संवाद सुनने को मिलेंगे लेकिन अच्छे संवादों का बस इंतज़ार ही रहा ,सरे संवाद औसत थे और गालियों से भरे थे |

80 के पूर्वांचल की स्थापना लगभग सही है। यहां तक ​​कि विवरणों पर भी थोड़ा ध्यान केंद्रित किया गया है जो निर्देशक ने श्रृंखला की प्रमुख संपत्ति में से एक है। शो की पटकथा यह साबित करती है कि 80 के माफिया के तौर-तरीकों को समझने के लिए रक्तांचल की टीम ने काफी शोध किया था और यह वास्तव में प्रभावशाली है और हर किरदार को बहुत अच्छी तरह से लिखा गया है।लेकिन स्क्रीन पे उतारते वक़्त कही चूक रह गयी |

सीरीज के 9 एपिसोड्स में कट्टा, बम, वर्चस्व, बाहुबल, गैंगवार, राजनीति जैसे वो तमाम एलिमेंट्स हैं| जो एक के बाद दूसरा एपिसोड देखने पर विवश करती है अंत पता होते भी, रोमांच इतना है कि आप सीरीज़ को पूरा देख सकते है |

रक्तांचल 80 के दशक में पूर्वांचल के टेंडर माफिया के बीच रक्तपात की कहानी है

#रक्तांचल वेब सीरीज कहानी  (Raktanchal Web Series Story)

रक्तांचल वेब सीरीज की कहानी पूर्वांचल के बाहुबलियों के गैंगवार से जुड़ी हुई| इसलिए  इसका काफी हिस्सा बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी और ब्रजेश सिंह के बीच हुई गैंगवार से काफी कुछ मिलता जुलता है | रक्तांचल का बैकग्राउंड भी वही है, और इलाका भी वही| हर एपिसोड के ओपनिंग सीन के साथ ही लिखा हुआ आ भी जाता है- Inspired by true events (सत्य घटनाओं से प्रेरित) 

कहानी की शुरुवात होती है बनारस में आबकारी के टेंडर की बोली से जहाँ पहले से ही सारा ठेका वसीम खान (निकितिन धीर) को मिल चूका है वहां भीड़ में मौजूद विजय सिंह (क्रांति प्रकाश झा) जबर्स्दस्त गोलीबारी करता है और जबरन सारा पूर्वांचल के शराब का ठेका वसीम खान से हथिया ले लेता है


यहीं से  एंट्री होती है विजय सिंह (क्रांति प्रकाश झा) की जिसे बाहुबली बनना है और और पूरे पूर्वांचल के अपराध जगत पर अपना सिक्का चमकाना है|


जहाँ एक तरफ वसीम खान के साथ राजनीती गलियारों का सपोर्ट है तो वही विजय सिंह की शुरुवात है |कहानी में विजय सिंह के बेक स्टोरी को भी फ़्लैश बेक के जरिये दिखाया गया है की वो कलेक्टर बनना चाहता था लेकिन वसीम के कारण वो इस रास्ते पे चल पड़ा बस उसका एक ही मकसद है की वो वसीम खान को ख़तम करना चाहता है |

आगे क्या होगा क्या विजय अपने मकसद में कामयाब हो पायेगा ,क्या वसीम खान उसे रास्ते से हटाने में कामयाब हो पायेगा ,आखिर क्या वजह है की विजय सिंह वसीम खान को बर्बाद कर ख़तम करना चाहता है | इन सवालो का जवाब आपको रक्तांचल देख कर ही मिलेगा |

# रक्तांचल वेब सीरीज का निर्देशन कैसा रहा?

            (Raktanchal Web Series Director)


रक्तांचल का सीरीज का निर्देशन रिमल श्रीवास्तव ने किया है और उन्होंने भरपूर कोशिश भी की है हर एपिसोड में नया रोमांच और सिरहन पैदा करने वाले एलीमेंट  डाले जाये |इसके लिए उनकी तारीफ करनी होगी की उन्होंने अपना बेस्ट देने की पूरी कोशिश की है|

जब निर्देशक क्राइम थ्रिलर बना रहा हो, उसके लिए यह बहुत जरूरी होता है की वह हर उस दृश्य को दिखाए जो कहानी की डिमांड होती है| लेकिन रक्तांचल वेब सीरीज़ के अंत तक ऐसा कोई सीन नहीं आता जिसे देख कर आप ये कहे क्या ज़बरदस्त सीन फिल्माया है |यही हाल संवाद का है गलियों से लबरेज़ संवाद कहानी को सपोर्ट तो करते है लेकिन अच्छे संवाद की कमी को पूरा नहीं करते |

ओवर आल अगर कहे तो रक्तांचल  इस तरह से शूट किया गया है की कहीं से भी आपको बोरियत का एहसास ना हो |

# रक्तांचल वेब सीरीज अभिनय विभाग (Raktanchal Web Series Acting Department)

सीरीज में नीतिकीन धीर और क्रांति प्रकाश झा ने वही काम किया है जिसकी उम्मीद निर्देशक ने उनसे की थी| बस नितिकन थोड़ा मायूस करते है | निकितिन धीर ने इससे पहले कई नकारात्मक भूमिकाएँ निभाई हैं, जैसे चेन्नई एक्सप्रेस, जोधा अकबर, दबंग 2 और कई और। लेकिन वसीम भाई के रूप में, कम आक्रामक लगे है।

क्रांति प्रकाश झा ने काफी अच्छा काम किया है जिन्होंने इससे पहले पहले एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी और कई और फिल्मों में छोटे-छोटे किरदार निभाए थे |
वहीं जिक्र अगर सपोर्टिंग कास्ट का हो तो ये लोग भी अपने काम के साथ पूरा इंसाफ करते नजर आए हैं.



 मेरे विचार रक्तांचल सीरीज़ के लिए

माफिया गैंगवार पे बॉलीवुड में तमाम सीरियल फिल्म आ चुकी है जिसे बार बार देखना अब बोरिंग सा लगता है क्यूंकि सभी की कहानी एक जैसी ही होती है | चाहे पाताल लोक हो या फिर मिर्जापुर और गैंग्स ऑफ वासेपुर इसमें हम पूर्वांचल के गैंगवॉर के दर्शन कर चुके है जो काफी अच्छे लेवल की वेब सीरीज़ है |साथ ही हम यह भी देख चुके हैं कि कैसे वहां दबंगई और बदमाशी होती है| तो अगर आपको अब भी पूर्वांचल को जानना समझना बाकी रह गया है और क्राइम थ्रिलर में आपका इंटरेस्ट है तो आप रक्तांचल देख सकते है |