दमदार विजुअल के साथ ज़ोंबी का थ्रिलर ड्रामा थोड़ा उत्साहित कर सकता है ? [बेताल वेब सीरीज़ रिव्यू]

#Betaal Web Series Review-दमदार विजुअल के साथ ज़ोंबीस का थ्रिलर ड्रामा थोड़ा देखने के लिए उत्साहित कर सकता है बाकि कुछ ख़ास नहीं,कहानी में थोड़ा सा नयापन था लेकिन बेताल वेब सीरीज़ देखने बाद ऐसा महसूस नहीं हुआ ,इस सीरीज़  में पैट्रिक ग्राहम पिछली सीरीज़ Ghoul के सारे मसाले रीपीट करते है| बस कुछ खास है तो ज़ोंबीस का थ्रिलर ड्रामा और एक्टर विनीत कुमार सिंह का अभिनय  जो थोड़ा बहुत बांधे रखता है


दमदार विजुअल के साथ ज़ोंबी का थ्रिलर ड्रामा थोड़ा उत्साहित कर सकता है ? [बेताल वेब सीरीज़ रिव्यू]

Betaal Web Series Review Duration & Cast and Crew

Release Date-24-MAY-2020
OTT – Netflix
Episode Duration: 42-45 min  (4episodes Series)
Genre-  हॉरर फिक्शन, एक्शन थ्रिलर
Cast (कास्ट): विनीत कुमार सिंह, अहाना कुमरा, जितेंद्र जोशी, सिद्धार्थ मेनन, मंजरी पुपला, सुचित्रा पिल्लई। स्वप्निल कोटरीवार
Producer (निर्माता) – जेसन ब्लम, शाहरुख खान, गौरी खान, गौरव वर्मा
Director (निर्देशक): पैट्रिक ग्राहम और निखिल महाजन
Writer (लेखक): पैट्रिक ग्राहम और सुहानी कंवर
Cinematographer (छायाकार): ................
Rating (रेटिंग): ⭐⭐स्टार (में से)

    # बेताल वेब सीरीज रिव्यू (Betaal Web Series full Review)


भूतो पे तमाम फिल्मे और वेब सीरीज़ आ चुकी है कुछ तो दर्शको डराने में सफल हुई तो कुछ दर्शको को हँसाने में कामयाब रही| लेकिन बेताल से कुछ उम्मीदे बांधती है Ghoul जैसी सफ़ल हॉरर फिक्शन, थ्रिलर देने वाले पैट्रिक ग्राहम इस बार बेताल लेकर आये, लेकिन शायद ही “बेताल” आपको वो रोमांच देने में सफल हो? कमज़ोर कहानी, वीक स्क्रीनप्ले आपको निराश कर सकता है| बेताल वेब सिरीज़ की ख़ास बात ये है की इसे तो कोई कमज़ोर दिल वाला भी देख सकता है

हॉरर सब्जेक्ट  कॉमेडी की तरह ही  सबसे कठिन माना जाता है और हर कोई इसमें सफल नहीं होता है। पैट्रिक ग्राहम ने निखिल महाजन के साथ निर्देशन किया है| उन्हें उम्मीद थी की  Ghoul जैसे परिणाम मिलेंगे, लेकिन कही चूक गए|

हालांकि, निखिल महाजन के साथ ग्राहम ने कहानी और गति को अच्छी तरह से संभाला है, कम से कम शुरुआती एपिसोड में। सीरीज़ के पक्ष में ख़ास बात ये है की  इसमें केवल चार एपिसोड ही हैं, जो कहानी को को पॉइंट तो पॉइंट रखती है |

सीरीज़ की पहले एपिसोड से इसकी विसुअल्स इम्पैक्ट का पता लग जाता है और आपको ये महसूस होगा की आप एक  रोमांचक सीरीज़ में प्रवेश कर चुके है लेकिन थोड़ी देर बाद वो रोमांच कही खोया हुआ नज़र आता है जो वापस तीसरे एपिसोड में वापस आता है ।


दमदार विजुअल के साथ ज़ोंबी का थ्रिलर ड्रामा थोड़ा उत्साहित कर सकता है ? [बेताल वेब सीरीज़ रिव्यू]


एक अन्य बात जो बेताल वेब सीरीज़ के पक्ष में काम करती है, इसकी कहानी में थोड़ी सी  लोकाचार में गहराई से निहित है। अलौकिक तत्व भारतीय इतिहास से लिया गया है जिसके बारे में सभी जानते हैं।

इसके अलावा, भूत के बजाय, ज़ोंबीस का उपयोग करना भी एक दिलचस्प विकल्प है। हालांकि हॉलीवुड में ज़ोंबीस के सब्जेक्ट पे काफी काम हुआ है और वो सफ़ल भी हुए है लेकिन  बॉलीवुड में अभी तक ज़ोंबीस के सब्जेक्ट पे कोई भी बड़ी हिट नहीं साबित हुई | 

इससे पहले सैफ अली खान की हॉरर कॉमेडी गो गोआ गॉन ही एक मात्र नाम ही ज़हन में आता है जो की बुरी तरह से फ्लॉप हुई थी खैर लेकिन, बेताल कॉमेडी वेब सीरीज़ नहीं है । 

इसे एक बार तो देखा जा सकता है वो भी विनीत कुमार सिंह के अभिनय ,अच्छे कैमरा वर्क , साउंड इफेक्ट ,लाइटिंग और अच्छे सेट के लिए जोकि वेब सीरीज़ के हिसाब से ठीक ठाक ही है | लेकिन इन सब विभाग पे थोड़ा और बेहतर फ़ाईन वर्क हो सकता था |


ओवर आल रिव्यु ये ही की दर्शको के लिए इससे देखकर वो ठगा हुआ सा महसूस करंगे | क्यूंकि रेड चिलिज़ और पैट्रिक ग्राहम से लोगो ने बड़ी उम्मीदे लगा ली थी |



# बेताल वेब सीरीज की कहानी (Betaal Web Series Story)

बेताल की कहानी की शुरुवात होती है एक गाँव से जहाँ सभी गाँव वाले इकठा होकर एक सुरंग में बेताल को देवता मानकर पूजा कर रहे है | जिससे वो शांत हो जाये वहां पर गाँव की सबसे बुजुर्ग महिला उसकी आत्मा से बात कर रही है तभी अचानक वो कहती है की सुरंग को बंद कर दो वो वरना आ जायेगा ..बेताल आ जायेगा | बस फिर क्या था वो सुरंग हमेशा के लिए बंद हो जाती है |

बेताल की कहानी केम्पा के जंगलो से घिरा छतीसगढ़ के निजला गांव की है जहां के लोगों का मानना है कि वहां एक ब्रिटिश ऑफिसर कर्नल जॉन लाइनडोख के भूत का साया है| इसलिए वो उस सुरंग को कभी नहीं खोलने देते है | लेकिन सूर्य डेवेलेपर के मालिक मुधलवन के ऊपर पोलिटिकल दवाब है की वो जल्द से जल्द उस सुरंग को खोले और सड़क निर्माण का कार्य पूरा करे | क्यूंकि की जल्द ही मुख्यमंत्री का दौरा होने वाला है|लेकिन उसके काम के रास्ते पूरा गाँव खड़ा है वो अपनी जिद पे अड़े हुए है उनका मानन है की अगर वो सुरंग खोली तो तबाही हो जाएगी कर्नल जॉन लाइनडोख आत्मा जीवित हो जाएगी और सबको ख़तम कर देगी | लेकिन उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज कर ,इसका हल निकलने के लिए CIPD (काउंटर इंसर्जेंसी पुलिस विभाग) ये प्रोजेक्ट सौपा जाता है |


इस प्रॉब्लम को सुलझाने के लिए सरकार कुछ आर्मी ऑफिसर्स को उस गांव में भेजती है| इस टीम को विक्रम सिरोही (विनीत कुमार) लीड कर रहे हैं| जैसे कहानी आगे बढती है, सस्पेंस थ्रिल के साथ कई दफ़न राज़ खुलने लगते हैं| तो वही आर्मी ऑफिसर्स को टर्नल में ब्रिटिश ऑफिसर्स की 200 साल पुरानी लाशें मिलती है| जिससे सभी आर्मी ऑफिसर्स के होश उड़ा जाते है| लेकिन कहानी तो असल में यहां से शुरु होती है|
गांव वाले बताते हैं कि गांव के पास मौजूद पहाड़ी को श्राप है, अगर टर्नल खुला तो वो ब्रिटिश ऑफिसर सबको अपनी आर्मी में शामिल कर लेगा | इस ब्रिटिश ऑफिसर कर्नल जॉन लाइनडोख के भूत का नाम बेताल है | लेकिन उनकी बातो को अनसुना कर सभी को मौत के घाट उतर दिया जाता है |
कर्नल जॉन लाइनडोख की आत्मा जीवित हो जाती है साथ ही उसकी ज़ोंबी सेना भी एक्टिव हो जाती है और वो आर्मी पे अकर्मण कर देती है | सभी  लोग पुराने आर्मी के सेफ हाउस में शरण लेते है लेकिन यहाँ पर दिमागी खेल शुरू होता है |
सब एक दुसरे को मारने लगते है अब बहार ज़ोंबी सेना और अंदर अपने ही दुश्मन ये पहचान पाना मुश्किल हो जाता है |

बेताल वेब सीरीज अब बेताल की इस हैवानियत के पीछे क्या राज, उसकी मौत कैसे हुई| विक्रम सिरोही (विनीत कुमार ) अपनी टीम के साथ यहां से बचकर निकल पाएगा या नहीं? क्या ये गांव कभी श्राप मुक्त हो पाएगा?अगर आप इन सभी सवालों के जवाब जानना चाहते हैं तो आपको बेताल वेब सीरेज़ नेटफिलिक्स पर देखनी होगी |
# बेताल वेब सीरीज अभिनय विभाग (Betaal Web Series Acting Department)

विनीत कुमार सिंह अपनी अभिनय क्षमता पिछली कई फिल्मो और वेब सीरीज़ में अच्छे से प्रूफ कर चुके है वो बहुत ही सधे हुए और समर्पित अभिनेता हैं। बेताल वेब सीरीज़  में एक आर्मी ऑफिसर विक्रम सिरोही के रूप में अच्छे लगे है | लेकिन कमी है वेबसीरीज बनाने वालों कि वे उनके लायक अच्छे किरदार नहीं गढ़ रहे। वैसे बेताल में वो लीड रोल में होने के बावजूद ऐसा लगता है की उनके पास कुछ करने को था ही नहीं| 

तो वही आहना कुमारा (ऑफिसर अहलूवालिया) कहीं से अपने किरदार में ढल नहीं पातीं। वैसे मुझे लगता है की ये किरदार तो कोई भी पुरुष कलाकार कर सकता था, फिर एक महिला किरदार यहां बनाने की जरूरत क्या थी सुचित्रा पिल्लई (कमांडेंट त्यागी ) के लिए यहां करने को कुछ है नहीं सिवाय बालों के सफेद काले होने के। सेक्रेड गेम फेम एक्टर जीतेंद्र जोशी (मुधलवन) का किरदार भी सही ढंग से लिखा जाता तो मामला बन सकता था। जितेंद्र जोशी अपनी भूमिकाओं में व्यर्थ हैं। जोशी ने तमिल नाम, मुधलवन और एक मराठी उच्चारण ये बात राइटर की सोच पे सवाल खड़ा करता है| इसके आलावा करीब करीब सिंगल फेम एक्टर सिद्धार्थ मेनन भी है हाँ थोड़ा स्क्रीन क्रेडिट मंजरी पुपला ले जाती है जिन्होंने एक सांवली आकर्षक आदिवासी पुनिया के रोल निभाया है

ओवर आल सभी का अभिनय रेटिंग निकले तो औसत ही है क्यूंकि लेखक ने किरदारों को सही तौर से नहीं लिखा |

# बेताल वेब सीरीज निर्देशक (Betaal Web Series Director)

बचपन में हम सबने विक्रम बेताल देखा है ,शायद उस समय उसको देख कर डर नहीं लगता था लेकिन देखने में मज़ा बहुत आता था क्यूंकि वो रोमांच से भरा होता था जिसे शायद निर्देशक पैट्रिक ग्राहम और निखिल महाजन पैदा करने से चूक गए |पहले एपिसोड से कुछ उम्मीदे बांधती है की शायद ये एक बेहतरीन सीरीज़ होगी लेकिन 45 मिनट गुजरने के बाद उम्मीदे कम हो जाती है|

बेताल सीरीज़ को पैट्रिक ग्राहम और सुहानी कंवर ने लिखा है लेकिन वो लिखते वक़त एक्शन को तो ध्यान में रखा लेकिन किरदारों में जान डालना भोल गए |यही कारण है की सारे किरदार यहाँ तक की बेताल भी काफी कमज़ोर लगा | रही सही इस सीरीज़ का तकनीकी पक्ष वो भी बहुत ज्यादा कमजोर है। शूटिंग लगता है चलताऊ कैमरों पर बिना सही लाइटिंग के कर ली गई है।

कॉस्ट्यूम में भी कोई रिसर्च नहीं की गयी है। यहाँ तक की मेकअप भी बहुत सस्ता है।
ओवर आल कहे की सभी कुछ औसत दर्जे का ही है |Netflix India इस साल अभी तक कोई भी अच्छी सीरीज़ नहीं लाया है | इस पे उसे सोचना होगा ?