इराक में फंसा एक भारतीय परिवार कैसे अपने 6 साल के बच्चे का जन्मदिन मनाता है?

Chintu ka birthday movie short review-इललीगल तरीके से विदेश में जाकर कैसे एक भारतीय परिवार फंस जाता है |फिर भी वो कैसे छोटी छोटी चीजो से अपनी जिंदगी में ख़ुशी को बरक़रार रखता है |तमाम विपरीत परिस्तितियो में भी वो कैसे अपने 6 साल के बच्चे चिंटू का जनम दिन मनाता है | चिंटू का बर्थडे मूवी इसी कहानी को दिखाती है |आइये आगे इस मूवी का फुल रिव्यु पढ़ते है और जानते है की ये आपको देखनी चाहिए की नहीं ?


इराक में फंसा एक भारतीय परिवार कैसे अपने 6 साल के बच्चे का जन्मदिन मनाता है?



Chintu ka birthday Movie Review Duration & Cast and Crew

Release Date-05-June-2020

OTT – ZEE5
Film Duration:1Hr 23 min
Genre- ड्रामा फिल्म
Cast (कास्ट): विनय पाठक,तिलोत्तमा शोम,सीमा पाहवा,बिशा चतुर्वेद,
वेदांत चिब्बर
Producer (निर्माता) – तन्मय भट्ट, रोहन जोशी, गुरसिमरन खंबा,
आशीष शाक्या
Director (निर्देशक): सत्यांशु सिंह, देवांशु कुमार
Writer (लेखक): सत्यांशु सिंह, देवांशु कुमार
Music (संगीत): बेनेडिक्ट टेलर, नरेन चंदवारकर Cinematographer (छायाकार): सिद्धार्थ दीवान
Rating (रेटिंग): 2.5 स्टार (में से)

चिंटू का बर्थडे मूवी फुल रिव्यू (Chintu ka birthday Movie full Review)


2019 के जागरण फिल्म फेस्टिवल में Viewer’s Choice Award प्राप्त चिंटू का बर्थडे फिल्म की कहानी ही इसे आम फिल्मो से अलग बनती है | जैसे की मैंने पहले बताया है की इसकी कहनी इराक के बगदाद शहर की है जहाँ एक भारतीय प्रवासी मदन तिवारी (विनय पाठक) का परिवार फंस गया है | तमाम कोशिशो के बाद भी वो अपने वतन वापस नहीं आ पा रहा है | इराक पे युद के बादल छये हुए है सदाम का पतन हो चूका है लेकिन अमेरिकी सेना अभी वहां पे डेरा जमाये हुए है |

लेकिन फिर भी मदन तिवारी का परिवार ज़िन्दगी में छोटी सी खुशियों को कैसे सेलिब्रेट करता है |इसी को बयां करती है चिंटू का बर्थडे की कहानी

लेखक-निर्देशक की जोड़ी सत्यंशु सिंह और देवांशु कुमार की पहली फीचर फिल्म है,जो अपनी पटकथा के माध्यम से सही समय और भावनाओं को दर्शाने में कामयाब होते है | ये फिल्म बच्चे को केंद्र में रखकर लिखी गयी है यहाँ निर्देशक की तारीफ करनी होगी की उसने बच्चे के आश्चर्य और मासूमियत को बनाये रखा हैंकलाकारों के मजबूत प्रदर्शन से 83 मिनट की ये फिल्म एक बार देखी जा सकती है चिंटू का जन्मदिन आम लोगों के बारे में एक छोटी सी फिल्म है जो लालच द्वारा बड़ी दुनिया में सरल सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहा है। 

फिल्म की छोटी अवधि भी तनाव को बनाए रखती है। मदन तिवारी का परिवार अपने 6 साल के बच्चे चिंटू का जन्मदिन कैसे मनाएंगे ? जहाँ घर पे मौजूद दो अमेरिकी सैनिक घुस आये है बहार गोलिया चल रही है तो इन हालत में चिंटू कैसे अपना बर्थडे मनायेगा ? छोटे मार्मिक विवरणों से ये फिल्म जीवंत लगती है जिसे लेखक निर्देशक बखूबी ढंग से फिल्माया है | 

फिल्म की अवधि की बात करे तो 10 मिनट शोर्ट की जा सकती थी |क्युकी थोड़ी सी खिची हुई लगती है | फिल्म की शूटिंग में एक इराक़ी घर का सेटअप है और एक गली जिसे सिनेमेटोग्राफर सिद्धार्थ दीवान एहसास नहीं होने दिया है की इसे कहाँ शूट किया है |

चिंटू का बर्थडे मूवी की कहानी 

(Chintu ka birthday Movie Story)

साल 2004 इराक़ के बग़दाद शहर में मदन तिवारी (विनय पाठक )अपनी पत्नी सुधा(तिलोत्तमा शोम) और दो बच्चे के साथ रहत था |वो बिहार से इराक़ वाटर प्यूरीफाई बेचता है लेकिन हालत बिगड़ गए है और वो भारत वापस लौटना चाहता है | भारतीय दूतावास सभी भारतीयों को वापस बुला चूका है लेकिन नेपाल के पासपोर्ट के द्वारा इराक़ में आने वाले मदन तिवारी का परिवार वही फंस जाता है |

काफी वक़्त गुजर जाने के बाद भी अभी मदन ने हार नहीं है बल्कि हालत  का सामना करते हुए भी वो अपने बच्चो को खुश रख रहा है |

तभी तो चिंटू (वेदांत चिब्बर) के छठे बर्थडे की तेयारी चल रही है |वादे अनुसार सब कुछ चिंटू के अनुसार हो रहा है | पापा मदन स्कूल में बटने के लिए टॉफी लेकर आये है और केक चिंटू की बड़ी बहन लक्ष्मी (बिशा चतुर्वेद) स्कूल से वापस आते हुए लेकर आयेगी |

तभी अचानक हालत ख़राब हो जाते है बम के धमाके होते है लक्ष्मी भी वापस आ जाती है लेकिन केक नहीं लती है | उसके बाद पूरा परिवार मिलकर केक बनाने की तेयारी कर रहा है तभी अमेरिकी सैनिक घर में घुसते है और रूटीन चकिंग के चलते उन्हें कुछ ऐसा मिलता है की वो मदन को पकड़ लेते है |

अब क्या मदन का परिवार चिंटू का बर्थडे मना पायेगा ?अमेरिकी सैनिको को ऐसा क्या मिला की वो मदन को पकड़ लेते है?इन सवालो का जवाब मिलेगा आपको चिंटू का बर्थडे में |

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चिंटू का बर्थडे मूवी में अभिनय विभाग (Chintu ka birthday Movie Acting Department)



परिवार के कुलपति के रूप में विनय पाठक अपना प्रभाव छोड़ते है विपरीत परीस्तितियो में भी उनके चहरे पे मुस्कान बने रहना विनय पाठक की खासियत है |वो इसे अच्छे से करते है ।


तो वही चिंटू के रोल में वेदांत चिब्बर की तारीफ़ भी बनती है |क्यूंकि जब कहानी में ऐसा माहोल आता है जब उसका बर्थडे अमेरिकि सैनिक तहस नहस कर देते है तो उसके चहरे पे भोलापन स्क्रीन टाइम को कैप्चर करता है |आप उस समय नज़र नहीं हटा पाएंगे | चिब्बर का टिट्युलर चिंटू के रूप में कास्टिंग तालियों का हकदार है। फिल्म में तनाव को बढाने वाले दो अमेरिकी सैनिकों रेजिनाल्ड एल बार्न्स और नाथन शोलज़ ने अच्छा काम किया है वो कहानी में टेंशन बढ़ाते है |

इसलिए उनके सक्षम प्रदर्शन और पाठक की ईमानदारी कहानी को ट्रैक पर रखती है। तिलोत्मा शाओम माँ के रूप में परफॉरमेंस काफी अच्छा किया  हैबिशा चतुर्वेदी चिंटू की बड़ी बहन लक्ष्मी के किरदार में है जिसके पास अपेक्षाकृत कम स्क्रीन-टाइम होते हुए भी वो अपनी छाप छोडती है |


 चिंटू का बर्थडे मूवी निर्देशक (Chintu ka birthday Movie Director)

अब बात करते है चिंटू का बर्थडे के निर्देशन की तो निर्देशक सत्यंशु सिंह और देवांशु कुमार की जोड़ी ने इसे लिखा और इसका निर्देशन भी किया है |इसीलिए फिल्म की सौल को दोनों ने बरक़रार रखा है | यही कारण है की आप फिल्म से बंधे रहते है फिल्म की कहानी के अनुसार ही एक्टर्स का सिलेक्शन किया गया है खासकर विनय पाठक जो स्क्रीन पे अपने इमोशन को होल्ड कर करके रखते है | ओवेराल बात करे तो फिल्म का निर्देशन भी ठीक ठाक है आपको बंधे रखेगा खलता तो फिल्म का स्क्रीन टाइम 1 घंटा 23 मिनट थोड़ा जाएदा है थोड़ा क्रिस्प किया जा सकता था |

मेरे विचार



आप ये फिल्म देख सकते है भले ही फिल्म की कहानी काल्पनिक है लेकिन असिलियत के करीब महसूस होगी | फिल्म की कहानी और विनय पाठक एवम वेदांत चिब्बर का अभिनय फिल्म को देखने लायक बनाते है खासकर वेदांत उर्फ़ चिंटू के मासूम सवाल |