खेमेबाजी का शिकार फिल्म जगत,क्या सुशांत की मौत Nepotism के कारण हुई?

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद एक बार फिर से ये मुद्दा गरमा गया है की क्या बॉलीवुड खेमेबाजी का शिकार है ? क्या नेपोटिज्म के चलते फिल्म जगत में नए लोगो को एंट्री नहीं मिलती है ? अगर किसी मेहनती और किस्मत के धनी को बॉलीवुड के रुपहले परदे में डेब्यू करने का मौका मिल भी जाता है ,तो उनकी तरक्की के आड़े खेमेबाजी और नेपोटिजम  आ जाता है |

खेमेबाजी का शिकार फिल्म जगत,क्या सुशांत की मौत Nepotism के कारण हुई?


सुशांत सिंह राजपूत की मौत इसपे एक बड़ा सवाल छोड़ जाती है ? जिसका जवाब शायद ही बॉलीवुड में किसी के पास हो ? सुशांत की मौत उभरते हुए नये कलाकारों का थोड़ा सा मनोबल तो कमज़ोर कर ही देगी | जब इतना सफल कलाकार नेपोटिजम और खेमेबाजी का शिकार  हो सकता है तो उनका क्या जिनका बॉलीवुड में कोई गॉड फादर नहीं है?


खेमेबाजी का शिकार फिल्म जगत,क्या सुशांत की मौत Nepotism के कारण हुई?

34 वर्षीय सुशांत सिंह राजपूत पढने में काफी अच्छे थे इसलिए जब उन्होंने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा(Engineering entrance exam) दिया तो उनका 11 जगह चयन हुआ था तो फिर उन्होंने दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश लिया और अपनी मर्जी से लास्ट इयर पढाई छोड़ कर बॉलीवुड का रास्ता तय कर लिया|

इस तरह का दृढ़ निश्चय वाला सुशांत कैसे खुद ख़ुशी कर सकता है ? क्या सुशांत को बॉलीवुड में एक आउटसाइडर होने का दबाव था ?क्या उनके पास काम की कमी थी ? क्या उनका कोई गॉड फादर नहीं था ?

सवाल तो बहुत है?लेकिन जवाब के लिए सुशांत अब दुनिया में नहीं है लेकिन एक पुराना वाकया है जब सुशांत ने एक फैन्स से कहाँ था की उनका कोई गॉड फादर नहीं है |

“अगर आप मेरी फिल्म देखने नहीं जाएंगी, तो ये मुझे बॉलिवुड से बाहर फेंक सकते हैं........मेरा कोई गॉड फादर नहीं है.. मैंने आप लोगों को ही अपना गॉड और फादर बनाया है.. प्लीज देखें अगर आप चाहते हैं कि मैं बॉलिवुड में सरवाइव करूं”।
यह बात भले ही सुशांत सिंह राजपूत ने फैन से मजाक में कहीं होंगी, लेकिन इससे उनके अन्दर का दर्द झलक रहा था | सुशांत अक्सर बॉलीवुड की चमक-दमक भरी फिल्म इंडस्ट्री में खुद को अकेला महसूस करते थे। 

यही कारण है की बॉलीवुड से लेकर सोशल मीडिया फैक्ट्री तक अब नेपोटिजम और खेमेबाजी पर बहस शुरू हो गयी है |




खेमेबाजी का शिकार फिल्म जगत,क्या सुशांत की मौत Nepotism के कारण हुई?


बॉलीवुड में बढ़ते नेपोटिजम पे उठ रहे सवाल ?


अभी कुछ ही दिनों पहले की बात है जब मनोज मुंतसिर ने अवार्ड फंक्शन से किनारा किया था क्यूंकि उनका लिखा गाना "तेरी मिटटी " केसरी फिल्म को बेस्ट सॉंग अवार्ड नहीं मिला था। बेस्ट सॉंग अवार्ड 'गली बॉय' के एक गाने को मिला था। तब भी इसी तरह की चर्चा उठी थी लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। 

ये कोई पहली दफा नहीं है बॉलीवुड का तो इतिहास रहा है की यहाँ उभरते हुए कलाकारों को हमेशा से दबाया जाता है | चाहे एक्टर ,सिंगर ,म्यूजिक डायरेक्टर यहाँ तक की अब फिल्म डायरेक्टर ही क्यूँ ना हो |

आपको याद होगा जब अभिनव कश्यप ने सलमान को लेकर दबंग बनायीं थी उसके बाद सलमान ने अपने भाई को सेट करने के लिए कैसे अभिनव कश्यप को दबंग सीरीज़ से जबरन बहार का रास्ता दिखा दिया गया था |


बहुत से उदाहरण है लेकिन कामयाबी के बाद भी सुशांत ने आखिर क्यों लगाई फांसी? इस सवाल का जवाब तो पोस्टमार्टम में भी नहीं मिलेगाजब मौत की वजह जेहनी हो तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट  कैसे खुलासा करेगी?

सुशांत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट  में उनकी मौत गला दबने और दम घुटने के कारण से हुई ये तो बता दिया लेकिन ये कौन बताएगा की एक सफ़ल अभिनेता लगातार नेपोटिजम और खेमेबाजी का शिकार हो रहा था|

ऐसे कितने कलाकार छोटे शहरों से बॉलीवुड में अपनी किस्मत अजमाने आते है जिनके पास अच्छे अभिनेता होने का दम ख़म और टेलेंट तो होता है लेकिन काम नहीं | सालो मुंबई में स्ट्रगल करते रहते है आर्थिक और पारिवारिक दोनों मोर्चो पे उनका सामना हर रोज़ होता है बस इसी उम्मीद में की आखिर एक दिन उन्हें काम मिलेगा |

तमाम उतार चढाव के बाद जब काम मिलता है तो उन्हें आउटसाइडर के तगमे से नवाज़ दिया जाता है | उनके पास काम तो होता है लेकिन प्रोत्साहन नहीं होता और नहीं बड़े बजट की फिल्मे | ये ही फेज़ सुशांत सिंह राजपूत झेल रहे थे |

सूत्रों की माने तो सुशांत ने छिछोरे की हिट के बाद 7 फिल्में साइन की थी। जोकि बड़े बैनर की फ़िल्मे थी।लेकिन धीरे धीरे सारी फिल्मों में  सुशांत के हाथ से निकल गई । या तो शुरु होने से पहले बंद हो गई जैसे पानी जिसे शेखर कपूर बना रहे थे और इसे प्रोड्यूस यश राज बैनर कर रहा था ।लेकिन किसी कारण वश उसने इस प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए और फिल्म बंद हो गईं।


इसी तरह भट्ट बैनर की सड़क 2 भी उनके हाथ से निकल गई।वजह पता नहीं लेकिन कहीं ना कहीं नेपोटिज्म हावी था।

क्या कहा नेपोटिजम को लेकर कुछ बॉलिवुड सिलेबस ने ?


तमाम बॉलिवुड सिलेब्रिटीज सुशांत सिंह राजपूत की इस तरह असमय मौत पर अपना शोक जाहिर किया हैं तो कोई दिमागी परेशानी (MENTAL HEALTH) पर खुलकर सामने आने की सलहा दे रहा हैं।

लेकिन बॉलीवुड में सुशांत के फैन्स और कई स्ट्रगलर आर्टिस्ट्स उन सिलेब्स की पोस्ट को डबल स्टैंडर्ड के तौर से देख रहे ।  

अनुभव सिन्हा ,धमेंद्र, कंगना रनौत, शेखर कपूर, मीरा चोपड़ा, रजत बरमेचा, रणवीर शौरी, सपना भवानी और निखिल द्विवेदी जैसे कई बड़े दिग्गज फिल्मकार ने सुशांत की आत्महत्या के बाद इंडस्ट्री में भेदभाव पर सवाल उठाए हैं।

क्या कहा एक्टर प्रोड्यूसर निखिल द्विवेदी ?


'कोई आपत्ति नहीं है कि आप सिर्फ चढ़ते सूरज को सलाम करें ! शायद सभी करते हैं.. आपत्ति इसमें है कि ढलते वक़्त जिस सूरज से आपने रोशनी ली हैआप उसी सूरज से नजर चुराते हैंऔर तो और उसकी खिल्ली भी उड़ाते हैं। एक दूसरे के टच में रहने वाली बात न करेंक्या आप अभय देओल और इमरान खान के टच में हैं.. नहीं न.. अगर उनका करियर चमक रहा होतातो शायद वे आपके सर्किल में होते..।

 कंगना ने खोली नेपोटिजम पर बॉलीवुड की पोल

सुशांत की असमय मौत पर शोक जाहिर करने वाले सिलेब्स को कंगना ने आड़े हाथों लिया। कंगना ने एक विडियो पर नेपोटिजम की बात कहते हुए कहा कि 'गली बॉय' जैसी वाहियात फिल्म को अवॉर्ड मिले, लेकिन 'छिछोरे' को क्यों नहीं? 'सुशांत की मौत ने हम सबको झक-झोर कर रख दिया है। मगर कुछ लोग इस तरह से चला रहे हैं कि जिन लोगों का दिमाग कमजोर होता है, वे डिप्रेशन में आते हैं और सूइसाइड करते हैं।
 एक इंजीनियरिंग के इंट्रेंस एग्जाम रैंक होल्डर का दिमाग कमजोर कैसे हो सकता है? वह साफ कह रहे थे कि प्लीज मेरी फिल्में देखो, मेरा कोई गॉडफादर नहीं है, मुझे इंडस्ट्री से निकाल दिया जाएगा। क्या इस हादसे की कोई बुनियाद नहीं है। सुशांत  के लिए आप लिखते हैं वह साइकोटिक  थे, न्यूरोटिक थे, अडिक्ट थे और बड़े स्टार्स की अडिक्शन तो बहुत क्यूट लगती है। तो यह सुइसाइड नहीं प्लान्ड मर्डर था। उन्होंने कहा तुम किसी काम के नहीं हो और वह मान गया और उन्होंने कहा तुम्हारा कुछ नहीं होगा, वह मान गया। दरअसल, वे चाहते ही हैं कि वे इतिहास लिखें कि सुशांत सिंह राजपूत कमजोर दिमाग का था। लेकिन वे यह नहीं बताएंगे सच्चाई क्या है।'


सच तो ये है की बॉलीवुड में हमेशा से नेपोटिजम और खेमेबाजी रही है |हर नया आने वाला कलाकार किसी फील्ड से हो उसे ये झेलना पड़ता है | यहाँ कुछ लोगो ने बॉलीवुड को अपनी बपोती मानते है |  यहाँ आये दिन तो स्टार्स की फिल्मो की रिलीज़ डेट के लिए पंगा रहता है | इस वार में बेचारा सुशांत सिंह राजपूत जैसे कहाँ टिकते | 

हैरानी तो तब होती है जब इसी आम जनता की भीड़ से निकल कर कोई स्टार बनता है तो भूल जाता है अपना पुराना दिन, वो भी बॉक्स ऑफिस की भगा दौड़ी में खो जाता है | और जब  उम्र ढलने लगती है तो अपनी औलाद को सेट करने में लगे रहते | तो फिर नए आउटसाइडर कहाँ जाये ? क्या वो फ़िल्मी दुनिया के सपने देखना छोड़ दे |


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