हॉरर के नाम पर छलावा है netflix की bulbbul फिल्म | बुलबुल फिल्म समीक्षा

Bulbbul netflix film review – बड़ी हवेली में दफ़न है बुलबुल की कहानी के राज़| इसी एक लाइन को पकड़ कर पूरी कहानी रच दी गयी है| बात काफी हद तक सच भी 2Oवी सदी के बक्त हवेलियों के अन्दर बड़े राज़ दफ़न हो जाया करते थे| जो कभी उजागर नहीं हो पाए| बुलबुल की कहानी बड़ी हवेली की चुड़ैल और बुलबुल के इर्द गिर्द घुमती है |

हॉरर के नाम पर छलावा है netflix की bulbbul फिल्म | बुलबुल फिल्म समीक्षा


इस फिल्म का निर्माण अनुष्का शर्मा के क्लीन स्लेट फिल्म्ज़ के तहत किया गया है | जिसका निर्देशन किया है अन्विता दत्त ने ,और मुख्य भूमिका में है।  

तृप्ति डिमरी,अविनाश तिवारी  और राहुल बोस | लेकिन क्या बुलबुल एक हॉरर फिल्म है ? क्या आपको देखना चाहिए ? बड़ी हवेली के ऐसे कौन से राज़ है ? 
आखिर क्या है बड़ी हवेली की चुड़ैल का राज़ ? क्या वाकई में कोई चुड़ैल है? 
आइये जानते है 

Bulbul Netflix Release Film Duration & Cast and Crew


Release Date-24-june-2020
OTT – Netflix
Episode Duration: 1 hr 34 min 
Genre- हॉरर
Cast (कास्ट): तृप्ति डिमरी,अविनाश तिवारी ,राहुल बोस पौली डैम
Producer (निर्माता) अनुष्का शर्मा (क्लीन स्लेट फिल्म्ज़ प्रोडक्शन)
Director (निर्देशक): अन्विता दत्त
Writer (लेखक): ......
Rating (रेटिंग): 2 स्टार (में से)

बुलबुल वेब रिलीज़ फिल्म रिव्यू


पाताल लोक की सफलता के बाद अनुष्का का क्लीन स्लेट फिल्म्ज़ प्रोडक्शन हाउस बुलबुल लेकर आया है | बुलबुल के टीज़र और ट्रेलर देख कर बड़ी उम्मीदे लगा ली थी,अनुष्का कोई धांसू हॉरर लेकर आ रही है | क्यूंकि शाहरुख खान के रेड चिल्ली 
की बेताल ने तो बड़ा निराश किया था|  

लिहाजा बुलबुल से उम्मीदे बढ़ गयी थी,लेकिन हॉरर के मामले में ये फिल्म भी बोर करती है | हालाँकि तृप्ति डिमरी और राहुल बोस की एक्टिंग और थोड़ी सी घिसी 
पिटी लव स्टोरी आपको 1 घंटा 34 मिनट झेलने की हिम्मत देगी | बाकी जिस 
चुड़ैल का जिक्र फिल्म में होता है उससे रूबरू होने का मौका आपको फिल्म के 
आखरी 15 मिनट में ही मिलेगा |

फिल्म बुलबुल के जरिये 20वी सदी के वक़्त औरतो की कैसी दुर्दशा होती थी और उनकी आवाज़ हवेली में कैसे दफ़न हो जाया करती थी । इसे स्क्रीन पर उतरने की, निर्देशक अन्विता दत्त ने अच्छी कोशिश की  है

साथ ही बेक ग्राउंड म्यूजिक अच्छा है | फिल्म में लाइटिंग और सिद्धार्थ दीवान की सिनेमेटोग्राफी काफी अच्छी है

जो सीन्स में दम भरने का कोशिस करती है लेकिन हॉरर के मामले में निर्देशक अन्विता दत्त चूक गयी है |

फिल्म के अंत में कई ऐसे राज़ खुलेंगे जिससे आप फिल्म की कहानी में चुड़ैल को  कनेक्ट कर पाएंगे | मेरे हिसाब से ये हॉरर फिल्म कम सस्पेंस फिल्म जाएदा लगती है |

बात रही मनोरंजन की तो,फिल्म की लेंथ डेढ़ घंटा है। जिसमे शुरू के 20 मिनट तो कहानी पकड़ने में लगा जाता है। बाकि रही चुड़ैल की बात, तो उसके दर्शन आखरी के 15 मिनट में ही होंगे । कुल मिलकर लगभग 45 मिनट का मटेरियल 1घंटा 34 मिनट में खीच कर परोसा गया है | आप 20 मिनट से जाएदा झेल नहीं पाएंगे बुलबुल फिल्म को उसके बाद आपको सच जानने के लिए फारवर्ड करना ही होगा | 

बुलबुल फिल्म की कहानी  


बुलबुल फिल्म की कहानी सन 1881 के दौर के बंगाल प्रेसीडेंसी के वक़्त की दिखाई गयी है जब बाल विवहा बड़े जोरो पे था इसमें छोटी उम्र की बुलबुल की शादी की तैयारी चल रही है , और बुलबुल पेड़ के आम तोड़ रही है | शादी में जब बुलबुल को ढूंढा जाता है तब उसकी माँ उसे बाग़ से ढूंढ कर लाती है | यहाँ इसकी मुलाकात 
सत्या से होती है जो की उसके होने वाले पति बड़े ठाकुर का छोटा भाई है |

बड़े ठाकुर (राहुल बोस )  बुलबुल से उम्र में काफी बड़ा होता है| बुलबुल और सत्या दोनों हम उम्र के होते तो दोनों में गहरी दोस्ती हो जाती है | दोनों का बचपन से 
जवानी में एक साथ कदम रखते है | जहाँ  धीरे धीर बुलबुल (तृप्ति डिमरी)  सत्या (अविनाश तिवारी) को चाहने लगती है लेकिन एक वक़्त आने पे बड़े ठाकुर (राहुल बोस ) सत्या  को पढाई करने के लिए लन्दन भेज देते है |

जब कई सालो के बाद सत्या हवेली वापस लौटता है तो हवेली में सबकुछ बदल जाता है| बड़े ठाकुर कही चले जाते है और उस हवेली पर किसी चुड़ैल का साया होता है, जो कि हर दिन किसी को जान से मार रही है| लेकिन विलायत से पढ़कर लौटे सत्या को  किसी भुत प्रेत की बात पर विश्वाश नहीं होता है | वो इसकी खोज बीन में लग जाता 
है |

लेकिन जैसे जैसे उसकी खोज आगे बढती है सत्या को कई सत्य का सामना करना पड़ता है | कहानी में कई ट्विस्ट एंड टर्न है जिसे जाने के लिए आपको netflix पे बुलबुल देखनी होगी |


मेरे विचार

इस फिल्म की कहानी प्लाट तो अच्छा है जो हॉरर फिल्म में कम ही देखने को मिलता है,लेकिन डेढ़ घन्टे की फिल्म में आखिर के 15 मिनट ही हॉरर सीन्स हो तो  ये हॉरर के चाहने वालो के साथ नाइंसाफी है | जो हॉरर सीन्स है भी वो जरा सा भी डर पैदा नहीं करते | 

बाकि फिल्म में पौली डेम ,राहुल बोस और तृप्ति डिमरी ने अपना अभिनय में जीजान लगा दी है | अविनाश तिवारी भी अच्छे लगते है |

सबसे ख़ास है इस फिल्म का लोकेशन ,लाइटिंग और सिनेमटोग्राफी जो आपको पसंद आएगी | कुल मिलाकर फिल्म में अच्छे हॉरर सीन्स डाले जा सकते थे |जिसकी कमी साफ़ झलकती है | नहीं तो कहानी को 45 मिनट में समेटा जा सकता था |

फिल्म वन टाइम वाच ही है। 

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां