रस नहीं है स्वरा भास्कर की रसभरी में | रसभरी वेब सीरीज़ समीक्षा

Rasbhari web series review-स्वरा भास्कर की रसभरी वेब सीरीज़ के पोस्टर और ट्रेलर ने जितना हुक बनया था | उतना ही ये वेब सीरीज़ निराश करती है | ना तो कहानी में कोई रस है और नाही स्वरा भास्कर के अभिनय में दम

रस नहीं है स्वरा भास्कर की रसभरी में | रसभरी वेब सीरीज़ समीक्षा

कहानी एक स्टूडेंट (नंद) का अपनी इंग्लिश टीचर (शानू बंसल ) के प्रति क्रश पे आधारित है | जिसके रस को चखने के चक्कर में नंदू को क्या क्या पापड बेलने पड़ते है | पूरी कहनी इसी पे आधारित है | लेकिन इसमें रसभरी का एक राज़ भी है जो की सीरीज़ के अंत में जाकर उजागर होता है चलिए जानते है की क्या रसभरी आपको देखनी चाहिए ? और क्या राज़ है रसभरी का ? क्या नंदू रसभरी का रस चखने में कामयाब होगा ? आइये जानते है

रसभरी वेब सीरीज़ फुल रिव्यू


स्टूडेंट और टीचर के बीच आकर्षण पे तमाम फिल्मे बन चुकी है | जिनकी कहनी लगभग एक सामान ही होती है | लेकिन रसभरी में स्वरा भास्कर को देख कर कुछ उम्मीदे थी, इस वेब सीरीज़ में कुछ खास होगा |

तनु वेड्स मन्नू ,रांझणा और नील बटे सन्नाटा जैसी हिट फिल्मो से अभिनय का लोहा मनवाने वाली स्वरा भास्कर ने जब भी वीरे दी वेडिंग में अपना बोल्ड अंदाज़ दिखया तो सबको हैरान कर दिया था | जिसको दर्शको में अच्छा ख़ासा पसंद भी किया था | 

इसलिए जब स्वरा कोई  फिल्म करती है तो उनसे उम्मीद बंध जाती है की उस फिल्म में कुछ खास होगा | लेकिन उन्होंने ये वेब सीरीज़ क्यूँ की समझ से परे है | रसभरी में उनका अभिनय का स्तर औसत ही है | 

अगर बात करे आयुष्मान सक्सेना की जो 11 वी  के छात्र के रोल में है | वो अपने रोल में छाप छोड़ते है | इसके अलावा इसमें सुनाक्षी ग्रोवर, नीलू कोहली, आयुष्मान सक्सेना, प्रद्यूमन सिंह और चितरंजन त्रिपाठी जैसे कलाकार भी हैं | लेकिन सभी की एक्टिंग औसत ही है |


निर्देशक निखिल भट्ट की ये वेब सीरीज़ सुर्खियों में तब आई जब इसको पिछले साल मेनिया इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (फ्रांस) के लिए चुना गया था। तब दावा किया गया था कि पहली बार किसी भारतीय वेब सीरीज ने इस फेस्टिवल के शॉर्ट फॉम्र्स कॉम्पिटीशन वर्ग में दावेदारी पेश की। 

चलो ये गर्व की बात हो सकती है लेकिन इंडियन दर्शको को ये फिल्म शायद ही पसंद आये कहानी में नयापन बिलकुल नहीं है और ना ही स्क्रीनप्ले ऐसा  है की आपको  आठवे एपिसोड तक बांधे रख पाए  | बस रसभरी को देखने के चक्कर में ऐसा लगता है की आप को बैठाकर बेवकूफ बनाया जा रहा है और कुछ नहीं |


नन्द (आयुष्मान सक्सेना) का अपनी इंग्सलिश टीचर शन्नो (स्वरा भास्कर) के प्रति  लस्ट आपको थोड़ी देर रोकने के लिए मजबूर करेगा | बाकी ऐसा कुछ नहीं है जो आपको पूरी सीरीज़ को देखने के लिए मजबूर करे | 



सीरीज़ की कहनी और अभिनय के अलावा सिनेमटोग्राफी भी औसत ही है या ये कह सकते है निर्देशक निखिल भट्ट ने उसके लिए कुछ छोड़ा ही नहीं था | 



कुल मिलकर रसभरी वेब सीरीज़ की रेटिंग औसत से भी कम है| रसभरी सीरीज़ की content quality अमेज़न प्राइम की नहीं लगती है|





रसभरी  वेब सीरीज कहानी  



मेरठ जैसे छोटे शहर के को टारगेट कर के रसभरी की कहानी को गढ़ा गया है |जिसमे ११वीं में पढने वाला नन्द (आयुष्मान सक्सेना) अपनी यौन जिज्ञासा को पूर्ण करने के लिए प्रण करता है की 12 पास करने तक वो अपनी कामाग्नि को पूर्ण कर लेगा | 



उसकी क्लासमेट प्रियंका उसे मन ही मन चहाती है लेकिन वो उसे इग्नोर करता रहता है | एक दिन स्कूल में नई इंगलिश टीचर शानू बंसल(स्वरा भास्कर ) आती है बस क्या था नन्द को पहली नज़र में सन्नो उर्फ़ शानू मैडम से क्रश हो जाता है | बस वो अपनी काम जिज्ञासा को उनके साथ पूर्ण करने का फैसला कर लेता है |



एक दिन वो शन्नों मैडम पीछे घर तक जाता है तब नन्द को पता चलता है की लाइन तो बड़ी लम्बी है| मेरठ शहर के सभी मर्द अपनी ठरक मिटने के लिए शानु के पीछे लगे हुए है |



अब एक अनार सौ बीमार के बीच नंद और प्रियंका (रश्मि आडगेकर) के रिश्तो में, प्रियंका नन्द के पास आना चहाती है लेकिन नन्द के ख्यालो में शानू मैडम है वो इस चक्कर में इग्नोर कर देता है | दोनों के रिश्तों में उतार-चढ़ाव बना रहता है |




वहीं शहर में रसभरी के चर्चे खूब जोरो से होने लगते है की जो भी मर्द उसके पास जात है वो तृप्त होकर ही लौटता है |  इस चक्कर में मोहल्ले की औरते भी परेशां हैं| उनके मर्द हाथ से निकलते जा रहे है | अब उन्हें लगता है कि जब तक शानू मैडम यहां रहेगी वो सारे मर्द जात को  बिगाड़ देगी।



इन्ही सब के बीच नन्द शानू मैडम से अंग्रेजी कोचिंग लेने लगता है| इस उम्मीद में की वो मौका देख कर अपनी यौन जिज्ञासा को तृप्त कर लेगा | एक इसी उम्मीद से वो शानू मैडम को किस (kiss) कर बैठता है लेकिन बदले में मिलता है जोरदार थप्पड़ |



बदले की आग में वो शानू बंसल के पति को जाकर सबकुछ बता देता है कि उसकी पत्नी के शहर भर के मर्दों से संबंध है|  लेकिन यहाँ कहानी में थोड़ा सा ट्विस्ट आता है|यहाँ उसका पति रसभरी की आत्मा के बारे में बताता है | जो उसकी शानू से ये सब कराती है | जिसके बाद नन्द को ऐसी हकीकत पता चलती है  की वो बदल जाता है|



लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी मोहल्ले की औरते शानू को मोहाले से बेईज्जत करके बहार निकाल लेने का प्लान बनती है | अंत में नंद शानू मैडम को बचाने के लिए क्या जुगत लगता है ? और क्लाइमेक्स में क्या होता है ? इसे देखने के लिए आप चाहे तो रसभरी देख सकते है | अगर नहीं भी देखे तो कोई हर्ज़ नहीं होगा | क्यूंकि बेरस है रसभरी |

मेरे विचार

अमेजन प्राइम की रसभरी में कुछ भी नया नहीं है | यहाँ तक की रसभरी के रूप में स्वरा भास्कर रिझाने में पूरी तरह से नाकाम रही हैं | बल्कि उनके अपोजिट काम 
कर रहे आयुष्मान सक्सेना नन्द के रोल में दर्शको थोड़ा मज़ा देते है |

रसभरी एक आत्मा है जो की  शानू जैसी स्ट्रिक्ट टीचर पे आती है और वो अचानक से मर्दों और औरतों को रिझाने लगती है | बस ये ही हज़म नहीं होता है | अगर ऐसा है भी तो उसका ट्रीटमेंट गज़ब का होना चाहिए था जो की है नहीं |जिस कारण  भुतहा एंगल काफी कनफ्यूजिंग हो गया है |

इस सीरीज़ की तुलना एकता के ऑल्ट बालाजी के एडल्ट contant से नहीं कर सकते | यहाँ तक की इससे कही बेहतर mx palyer की मस्तराम वेब सीरीज़ है | फिर भी अगर आप देखना चाहते है तो सर दर्द अपने पास रखे शायद जरुरत पद जाये |