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धांसू कमबैक है अभिषेक बच्चन का ब्रीद:इन टू द शैडोज़ वेब सीरीज़ का हिंदी में रिव्यू

Breathe- Into The Shadows web series review:-अभिषेक बच्चन (Abhishek bachchan) की डिजिटल डेब्यू 'ब्रीद: इनटू द शैडोवेब सीरीज अमेज़न प्राइम विडियो पर रिलीज़ हो गयी है जो की सस्पेंस और थ्रिलर के मसाले से भरपूर है | क्या ख़ास है इस वेब सीरीज मेंक्यूं इसे देखनी चाहिएक्या है ब्रीद: इनटू द शैडोवेब सीरीज कि कहानीजानने के लिए इसे पूरा पढ़े।

धांसू कमबैक है अभिषेक बच्चन का ब्रीद:इन टू द शैडोज़ वेब सीरीज़ का हिंदी में रिव्यू

इस सीरीज का आधा सस्पेंस तो में इस लेख में बता दूंगा लेकिन फिर भी आप ब्रीद: इनटू द शैडो' वेब सीरीज को देखना चाहेंगे। इस वेब सीरीज में सस्पेंस और थ्रिलर का भरपूर इस्तेमाल किया गया है। बात करे अभिषेक बच्चन के डिजिटल डेब्यू की तो,लंबे समय के बाद उन्हें स्क्रीन देखना उनके फैन्स को थोड़ा खुश कर सकता है। लेकिन मेरा मानना है की अभिषेक बच्चन का डेब्यू और भी धांसू हो सकता था। आपको क्या लगता है मुझे कमेन्ट करिए |

चलिए सीधे रिव्यू पे आते है,एक लाइन में कहूं तो ब्रीद: इनटू द शैडो' वेब सीरीज एक्सपेक्टेशन लेवल से कमतर है।लेकिन अच्छी है इसे वन टाइम वाच कह सकते है। कहानी 12 एपिसोड्स में काफ़ी खींच सी गई है। 

मयंक शर्मा  का निर्देशन 5th एपिसोड के बाद पकड़ छोड़ देता है। उसके बाद कहनी दाए बाए भागने लगती है। लेकिन यहां लेखक  तारीफ की करनी होगी उसने स्क्रीनप्ले और कहानी का ताना-बाना इस क़दर बुना है की कहानी में किडनैपर को जानने के बाद भी आप अंत तक चिपके रहेंगे। अगर निर्देशक मयंक शर्मा सीन को अच्छे से शूट करते और टाइट एडिटिंग होती तो ये वेब सीरीज बेहतर हो सकती थी।



कहानी


कहानी शुरू होती है दिल्ली की एक पॉश इलाके से जहाँ माता रानी का जागरण चल रहा है | वहां अपनी माँ के साथ आई गयत्री मिश्रा (Reshma Shrivardhan) भी मौजूद है | गायत्री एक मेडिकल स्टूडेंट है एग्जाम की पढाई के चलते वो अपनी माँ से घर जाकर पढाई करने को कह कर निकलती है | लेकिन आधी रात में उसका किडनेप हो जाता है | मीडिया में खबरे चलती है लेकिन कुछ नहीं होता |

वही दूसरी तरफ दिल्ली में एक सफल मनोचिकित्सक डॉक्टर अविनाश सभरवाल(Abhishek bachchan) का खुशहाल परिवार दिखाया गाया है | जिसमे उनकी पत्नी आभा सभरवाल( Nitya menen) और उनकी 6 साल की बच्ची सिया सभरवाल(Ivana kaur) है | 

आभा भी पेशे से एक होटल में शेफ है| सिया को डायबिटीज(मधुमेह) है जिसे दिन में तीन बार इन्सुलिन के इंजेक्शन लगते है | सब कुछ यहाँ भी ठीक चल रहा होता है लेकिन एक दिन सिया अपनी फ्रेंड की बर्थडे पार्टी में जाती है है जहाँ उसका भी किडनेप हो जाता है |


दिल्ली पुलिस के लाख प्रयास के बाद सिया का कुछ पता नहीं चलता है | ना अविनाश के पास कोई फिरोती की कॉल आती है | धीरे –धीरे दिन महीने गुजर जाते है लकिन 9 महीने बिताने के बाद भी कोई सुराग हाथ नहीं लगता | यहाँ तक की इस केस को सब भूल जाते है|


एक दिन अचानक अविनाश के पास एक बॉक्स आता है जिसमे टैबलेट मिलता है जिसमे सिया की कुछ क्लिप मिलती होती है,जिसमे वहां गायत्री भी मौजोद है | किडनैपर के पास सिया सुरक्षित है उसका अच्छे से देखभाल कर रहा है लेकिन आगे नहीं कर पायेगा इसके लिए अविनाश को कीमत चुकानी होगी |


सिया की वापसी के लिए किडनैपर अविनाश से प्रीतपाल नाम के व्यक्ति का क़त्ल करने को कहता है| अविनाश पुलिस में जाने की सोचते है लेकिन सिया को कुछ न हो जाये इस लिए वो इस मर्डर को करने के लिए राज़ी हो जाता है | लेकिन किडनैपर की शर्त है की वो मर्डर को लाइव रिकॉर्ड कर उसे न्यूज़ चेन्नल को भेजे |

अविनाश प्रितपाल (कुलजीत सिंह ) का क़त्ल करने में कामयाब हो जाता है जिसके बाद उसका लाइव विडियो वायरल हो जाता है | इसी वक़्त पुलिस ऑफिसर कबीर सावंत (अमित साध) मुंबई से दिल्ली शिफ्ट हो जाते हैं| और ये केस उन्हें मिल जाता है |


डॉक्टर अविनाश सभरवाल पुलिस की जांच में मदद करते रहते है लिहाजा उन्हें भी उन्ही के द्वारा किये मर्डर की जांच टीम में शामिल कर लिया जाता है |लेकिन मर्डरका सिलसिला रुकता नहीं है | किडनैपर प्रीतपाल के मर्डर के बाद अविनाश को दूसरा मर्डर करने को कहता है |

सबसे रोचक बात ये है की इतना सब कुछ जानने के बाद भी इस वेब सीरीज़ में तमाम सस्पेस की डोज़ बाकी है | जिनका अविनाश के भूतकाल (PAST) से कोई कनेक्शन दिखया गया है | 

अब सवाल उठता है की क्या है कनेक्शन ? आखिर क्यूँ इन दोनों का किडनैप किया ? आखिर क्यूँ उसने गायत्री और सिया को साथ रखा है ? आखिर क्या वजह है की किडनैपर अविनाश से लोगों को मारने के लिए बोल रहा है? क्या अविनाश ही लोगों का खून कर रहे हैं| अब क्या कबीर सावंत इस मिस्ट्री को सुलझा पाते हैं या नहीं इसे देखने के लिए आपको देखनी पड़ेगी 'ब्रीद: इनटू द शैडो' सीरीज|  सस्पेंस और थ्रिलर का भरपूर मसाला बाकि है |


अगर आप चाहेंगे तो मैं आधा सस्पेंस खोल सकता हूँ लेकिन आपका मज़ा ख़राब हो जायेगा | अगर आप चाहते है तो कमेन्ट बॉक्स में लिखे मैं आपको बता सकता हूँ |


क्या है ख़ास ? और क्या है ख़राब ?


  1. 'ब्रीद: इनटू द शैडो' का स्क्रीनप्ले अच्छा कह सकते है बस कहानी के सभी किरदारों का पास्ट समेटने के चक्कर वेब सीरीज़ का पेस थोड़ा स्लो हो जाता है |
  2. सस्पेंस थ्रिलर का मसाला अच्छे से इस्तेमाल किया है |
  3. कहानी की बात करे तो काफी कमज़ोर है| कुछ भी नया पेश करने में नाकाम होती है सिवाय अभिषेक बच्चन और नित्या मेनेन की अदयागी के | जिसका क्रेडिट दोनों एक्टर्स को जाता है की उन्होंने सीरीज़ में अपने अभिनय से पकड़ बना के रखी है |
  4. इसकी कहानी ब्रीथ के पहले सीज़न से भी कमज़ोर है |
  5. पर्फोर्मंस के मामले में अभिषेक बच्चन (एक पिता)और साउथ की एक्ट्रेस नित्या मेनन (माँ) स्क्रीन अपना असर छोड़ने में कामयाब होते है तो वही अमित साद अपने आपको रिपीट करते हुए नज़र आते है| नित्या अपने इमोशनल सीन्स में जान डाल देती है तो वही अभिषेक एक पिता के रूप अपने इमोशन,गुस्से, प्यार और चालक दिमाग का सही तौर से इस्तेमाल करते है |
  6. मेरे हिसाब से 12 एपिसोड की सीरीज़ को 9 एपिसोड्स में समेटा जा सकता था|
  7. अभिषेक बच्चन की OTT प्लेटफार्म पे अच्छी शुरुवात कह सकते है,बस अगर कहानी में थोड़ा सा दम होता तो शायद उनके फैन्स को उन्हें दुबारा स्क्रीन पर देखने का मज़ा भी दुगना हो जाता





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