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UNDEKHI: समाज के घिनौने काले सच को उजागर करती है,हिंदी में रिव्यू

UNDEKHI SONY LIV ORIGINALS वेब सीरीज़ भारतीय समाज के काले अंधेरे पक्ष पर आधारित एक धारदार कहानी है। इस वेब सीरीज़ के 10 एपिसोड के दौरान, आप महसूस करेंगे कि हमारे देश के शक्तिशाली पुरुष अपने काले रहस्यों को छिपाने के लिए समाज में अपनी दबंगई और रसूख के बल का उपयोग कैसे करते हैं। दूसरी ओर, एक ईमानदार पुलिस अधिकारी है जो अपनी ड्यूटी ईमानदारी से निभाने लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। लेकिन क्या वो पुलिस अधिकारी शक्तिशाली पुरुषों द्वारा चलाए जा रहे इस भ्रष्ट तंत्र के साम्राज्य में अपना काम करने में सक्षम हो पायेगा?

क्या सच भ्रष्ट तंत्र की भेट चढ़ जायेगा ? क्या होगा उस क़त्ल को जो शादी की रात में घटता है ? इस जवाब को पाने के लिए आपको SONY LIV की ORIGINALS वेब सीरीज UNDEKHI देखनी होगी। 


UNDEKHI: समाज के घिनौने काले सच को उजागर करती है,हिंदी में रिव्यू
undekhi web series review in hindi 

समीक्षा

UnDekhi सच्ची घटनाओ पे आधारित ये वेब सीरीज़ समाज के घिनोने काले सच को उजागर करती है, जहाँ पुरुषात्मक समाज औरतो की इज्ज़त को अपने पैरो तले रोंदने के लिए हर संभव प्रयास करता है | और जिसने भी इसके खिलाफ आवाज़ उठाई उसे भी रास्ते से साफ कर दिया जाता है |

मनाली के अटवाल खानदान के चस्मो चिराग दमन अटवाल की शादी के एक इवेंट (नशा पार्टी ) में एक स्टेज पर नाचने वाली की हत्या हो जाती है, लेकिन अगले दिन सब कुछ नार्मल हो जाता है जैसे बीती रात कुछ हुआ ही ना हो ? अटवाल का काला साम्राज्य मनाली के भ्रष्ट तंत्र का हिसा है इसलिए सब कुछ दफ़न हो जाता है |

लेकिन कुछ गवाह है जो इसे अपने कैमरे में कैप्चर कर लेते है | फिर क्या होता क्या सच सामने आता है ? या हमेशा के लिए दफ़न हो जाता है ? इसी लाइन पर ये पूरी सीरीज़ गढ़ी गयी है ,जो वाकई काफी अच्छी बनी है कही- कही थोड़ी स्टोरी ड्रेग होती है लेकिन सीरीज़ में सभी की उंदा एक्टिंग और आगे क्या होगा ? इस सवाल को खोजते हुए आप कब अंत तक पहुच जाते है आपको एहसास नहीं होगा |

अनदेखी मतलब की देखा हुआ सच आप अनदेखा कर दे ,इसी लाइन पे आधारित है ये वेब सीरीज़ अनदेखी |


क्या है अनदेखी की कहानी ?


हम आये दिन  न्यूज़ में ऐसी घटना को देखते सुनते है की फलाने जगह किसी शादी में रस फायरिंग के दौरान किसी की मौत हो गयी लेकिन अगले दिन हम भी भूल जाते है ,ऐसी ही एक सत्य घटना को आधार बनाकर निर्देशक आशीष आर शुक्ला ने अनदेखी की कहानी को मनाली के रसूकदार अटवाल फैमिली के इर्द-गिर्द रचा है |
चलिए भूमिका छोड़ कर सीधे कहानी पर आते है|

अनदेखी की कहानी शुरू होती है बंगाल के सुंदरबन के घने जंगल से,जहाँ एक पुलिस वाले की लाश मिलती है| इस केस की छानबीन डी एस पी घोष (दिब्येंदु भट्टाचार्य) कर रहे है ,वारदात के स्थल पर डेड बॉडी की शिनाख्त के दौरान उन्हें पता लगता है की इस घटना के पीछे जंगल में रहने वाली दो ट्राइबल लड़कियों का हाथ है| बस फिर क्या उन दोनों ट्राइबल लडकियों की तलाश जरी हो जताई है |

तब पता चलता है की दोनों लड़किया हिमांचल प्रदेश के मनाली शहर में डांस परफॉरमेंस करने गयी है |फिर क्या डीएसपी घोष इन्वेस्टिगेशन सुंदरबन से हिमांचल के मनाली शहर की तरफ रुख करती है |

मनाली के एक रिज़ॉर्ट में अटवाल के चश्मे चिराग दमन अटवाल (अंकुर राठी ) की शादी की तेयारी चल रही है ,दमन की शादी तेजी गरेवाल(आंचल सिंह ) से हो रही है  अटवाल और गेरवाल दोनों ही मनाली की रसूक दार फैमली है |

शादी से एक दिन पहले ये पार्टी हो रही है ,लेडीज़ और जेंट्स दोनों का ही अलग अलग इन्तेजाम हुआ है | जेंट्स पार्टी नशे से सराबोर है ,गोलिया चल रही है ,दमन के पिता पप्पाजी (हर्ष छाया ) स्टेज पर पहुच कर वहां जो लडकिय डांस कर रही है उनके साथ ज़बरदस्ती करने लगते है मना करने पर वो एक के सर पर अपनी गन से फायर कर देते है ,मौके पे वो लड़की दम तो देती है |

लेकिन ये सारा वाकया वेडिंग फिल्म बनाने वाली टीम के एक लड़के ऋषि(अभिषेक चौहान) के कैमरे में रिकॉर्ड हो जाता है|

अगले दिन सुबह रिज़ॉर्ट का माहौल बिलकुल नॉर्मल हो जाता है की जैसे कल रात कुछ हुआ ही नहीं | किसी को याद ही नहीं की कल रात एक लड़की का मर्डर हो गया था ,यहाँ तक की पापाजी(हर्ष छाया ) को भी याद नहीं उसने कुछ किया है,जब उसे कोई याद दिलाता है की आपने कल एक लड़की को गोली मार दी थी जिसके जवाब में वो कहता अच्छा ऐसा मैंने किया ? कोई नहीं रिंकू देख लेगा?

मतलब की उनके लिए किसी की मौत के घाट उतरना मामूली सी बात है ,जिसके रसूक के आगे किसी की आवाज़ भी नहीं निकलती | ये सब रिंकू यानि राजेंदर सिंह अटवाल (सूर्य शर्मा ) के डर से |

फिर भी ऋषि पुलिस को इन्फॉर्म करना चहाता था ,लेकिन उसकी टीम लीडर (एनी जोया) मना करती है लेकिन अपने दिल की आवाज़ सुनकर वो पुलिस को इन्फॉर्म करता है | बस फिर क्या मुसीबतों का पहाड़ ऋषि के ऊपर टूट जाता है | इधर डी एस पी  घोष भी वहां  रिज़ॉर्ट  पहुच जाते है |

कहानी में ट्विस्ट ये आता है की जिस दो लडकियों को वो ढूंढने पहुचे थे वो दोनों वहां मिलती नहीं है लेकिन घोष शक हो जाता है की कुछ न कुछ इसी रिसोर्ट में घटा है | तो क्या घोष साहब की इन्वेस्टीगेशन और भी पेचीदा हो जाती है |

उनकी इन्वेस्टीगेशन के बीच का रोड़ा बनता है रिंकू अटवाल जहाँ घोष और रिंकू आमने सामने है | इस पूरी इन्वेस्टीगेशन के प्रोसेस में डी एस पी घोष का जो हाल होता है , वो पुलिस डिपार्टमेंट की कलई खोलकर रख देता है|

इतना ही नहीं इस सीरीज़ में और भी बहुत से मसाले है जिसे आपको देखने में ही पता लगेगा | कुल मिलकर कहानी कुछ खास नहीं है लेकिन उसका स्क्रीन प्ले वाकई ज़बरदस्त तरीके से लिखा गया है  जो इस सीरीज़ में बने रहने के लिए काफी है बाकि बहुत दिनों के बाद बेहद उम्दा क्राइम थ्रिलर सीरीज़ देखने को मिली है|

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