जान्हवी कपूर का औसत अभिनय गुंजन सक्सेना के शौर्य को पर्दे पर फीका कर देता है Gunjan Saxena Movie Review


Gunjan Saxena Movie Review:फिल्म की मेन लीड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर गुंजन सक्सेना के किरदार से न्याय नहीं कर पाई है | जान्हवी का औसत अभिनय रियल एयरफोर्स ऑफिसर गुंजन सक्सेना के शौर्य को पर्दे पर फीका कर देता है लेकिन गुंजन सक्सेना की रियल कहानी के लिए आप इस फिल्म को देख सकते है| साथ ही आपको पंकज त्रिपाठी के अभिनय के अलावा बाकि सभी सपोर्टिंग कास्ट का अभिनय फिल्म में बने रहने के लिए मजबूर कर देगा | आइये जानते फिल्म का फुल रिव्यू

जान्हवी कपूर का औसत अभिनय गुंजन सक्सेना के शौर्य को पर्दे पर फीका कर देता है Gunjan Saxena Movie Review

Star cast of Gunjan Saxena The Kargil Girl (गुंजन सक्सेना- कारगिल गर्ल)

Release date :12 August  2020
Cast (कलाकार): जान्हवी कपूर, पंकज त्रिपाठी, अंगद बेदी, मानव विज, रीवा अरोरा, आयशा रजा मिश्रा, मनीष वर्मा और विनीत कुमार
Director (निर्देशक): शरण शर्मा
OTT(ओटीटी): Netflix (नेटफ्लिक्स)



गुंजन सक्सेना मूवी समीक्षा

करण जौहर अभी नेपोटीजम के विवाद से उबर नहीं पाए थे उनके सामने एक नया विवाद खड़ा हो गया है उनकी प्नरोडूस की नई फिल्म गुंजन सक्सेना- कारगिल गर्लविवादों के घेरे में आ गयी है| ये फिल्म १२ अगस्त को नेत्फ्लिक्स पर रिलीज़ हो चुकी है | फिल्म को लेकर इंडियन एयर फाॅर्स ने सेंसर बोर्ड को एक चिठ्ठी लिखी कर शिकायत की है | आपको बता दे उन्होंने लिखा है,की इस फिल्म के कुछ सीन्स इंडियन एयर फाॅर्स की छवि को ख़राब कर रहे है | जिसके बाद से ही गुंजन सक्सेना फिल्म की IMBD रेटिंग भी गिर गयी है |

चलिए अब शुरू करते है इस फिल्म की समीक्षा की तो ये फिल्म एक बहादुर महिला की है जिसने बचपन में पायलट बनने का सपना देख लिया था| वो भी जब एक लड़की के लिए पुरुष समाज में, उसे केवल घर की चार दीवारों में क़ैद करके रखा जाता था| लेकिन अपने पिता के विश्वाश और खुद के ऊपर भरोसे से वो एयर फाॅर्स की पहली महिला एयर पायलट बनकर न सिर्फ अपने वतन का नाम रोशन करती है बल्कि समाज में लडकियों के लिए मिसाल पेश करती है| 

गुंजन सक्सेना ये वो नाम है जिसने 1999 में कारगिल जंग के दौरान भारतीय एयरफोर्स के पायलट दल में शामिल एकमात्र महिला होकर दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए थे| हालाँकि 1999 के बाद अब वायुसेना में महिला पायलट की संख्या अब 1600 के पार हो चुकी है।



सोचिये कितना जूनून रहा होगा गुंजन सक्सेना के पायलट बनने के पीछे, जिसे जाह्नवी कपूर अपनी औसत अभिनय से स्क्रीन पर प्रूफ नहीं कर पाती है | लिहाजा फिल्म देखने का एक्स्पीरीयंस ख़राब हो जाता है | 

झुके हुए खंधे के साथ किताबी एक्टिंग में गुथी हुई जान्हवी कपूर वायुसेना की वर्दी में स्क्रीन पर एक बार भी इम्प्रेस नहीं करती है | वो जज्बा और जूनून उनसे कोसो दूर है जो गुन्जन सक्सेना का रियल लाइफ में रहा होगा | 

वही गुंजन के पिता बने पंकज त्रिपाठी अपनी अंडरप्ले से दर्शको का दिल जीत जाते है | गुंजन के भाई बने अंगद बेदी के पास कुछ खास नहीं था करने के लिए लिहाजा वो फिल्म में एक्स्ट्रा कलाकार बने दिखाई देते है | लेकिन तारीफ करनी होगी बाकी सपोर्टिंग कास्ट की जिसने बड़ी इमानदारी से अपनी भूमिका निभाई है |

वायुसेना के भीतर के पुरुष माहोल में जब एक महिला की एंट्री है तो क्या एक औरत ने नाते गुंजन को झेलना पड़ा उसे सतही तौर से पेश किया गया है | अगर कुछ संवाद को छोड़ दे तो बाकि के संवाद बहुत औसत है| म्यूजिक भी अपना कोई खास असर नहीं छोड़ता है |

हालाँकि फिल्म का आखरी आधा घंटा ही फिल्म की जान बनता है बाकि फिल्म में कुछ खास दिखने में निर्देशक शरण शर्मा असफल होते है | 

गुंजन सक्सेना फिल्म की कहानी 


फिल्म की शुरुवात होती है 1999 के कारगिल वार के समय से जब सेना की एक टुकड़ी पहाड़ो में मूव कर रही है अचानक आतंकवादी हमला कर देते है जिसमे सेना के कुछ सिपाही घायल हो जाते है उन्हे रेस्क्यू करने के लिए वायुसेना की मदद  मांगी जाती है | (ये सीन जाह्नवी को इंट्रो सीन के तौर पर ही फिल्माया गया है )

अब कहानी फ़्लैश बेक में जाती है जहाँ छोटी गुंजन अपने भाई के साथ फ्लाइट में सफ़र कर रही है विंडो सीट में बैठने को लेकर भाई से नोक झोक चल रही है ये देखकर एक एयर होस्टेस छोटी गुंजन को पायलट के कॉकपिट में ले जाती है जहाँ के नज़ारा देख कर गुंजन के मन में पायलट बनने का सपना घर कर जाता है | अब वो दिन रात इसी सपने में जीती है | ( ये सीन पूरा फ़िल्मी है )

लखनऊ शहर में रहने वाली गुंजन अपने सपने को हर कीमत में पूरा करना चाहती है जहाँ उसके पिता उसके इस सपने को पूरा करने के लिए हिम्मत देते है तो वही उसकी माँ को लगता है टोना टोटका करके उसके सर से पायलट बनने का भुत उतर जायेगा | गुंजन का भाई भी नहीं चाहता की वो पायलट बने । 

लेकिन तमाम रूकावटो को लांघते हुए गुंजन कमर्शियल पायलट बनने की कोशिशें शुरू करती है लेकिन पैसो के आभाव के चलते वो ये सपना भूल जाती है लेकिन उसके पिता के समझाने पर वो वायु सेना के टेस्ट देने के लिए राज़ी हो जाती है और सेलेक्ट भी हो जाती है | वो भी एक मात्र महिला के रूप में | 

अब आगे का सफर इतना असान नहीं होता जितना गुंजन को लगता है, क्यूंकि पुरुष पेशे में जब एक मात्र महिला की एंट्री होती है तो क्या एक औरत होने के नाते उसे झेलना पड़ता है येही इस फिल्म दिखाया है | आगे गुंजन किस तरह अपनी जंग जीतती है इसे देखने के लिए नेत्फ्लिक्स पर आपको गुंजन सक्सेना- कारगिल गर्ल देखनी होगी |


एक्टिंग

गुंजन सक्सेना- कारगिल गर्ल इस रोल को श्रीदेवी –बोनी कपूर की सुपुत्री जान्हवी कपूर ने निभाया है | वो इससे पहले धर्मा प्रोडक्शन की ही फिल्म “धड़क” में नज़र आई थी | करण जौहर ने जब गुंजन सक्सेना फिल्म का ट्रेलर रिलीज़ किया था तो लगा था जाहनवी का धमाकेदार परफोर्मेंस देखने को मिलगा लेकिन ये सिर्फ ट्रेलर तक ही सिमित था क्यूंकि फिल्म में वो जरा सा भी गुंजन सक्सेना की पीड़ा ,जज्बा ,वीरता और शोर्य को स्क्रीन पर प्रूफ नहीं कर पाई है |

इसके अलावा फिल्म में पंकज त्रिपाठी है जिन्होंने गुंजन सक्सेना के पिता का रोल निभाया है | एक्स इंडियन आर्मी ऑफिसर बने है | पंकज एक ऐसे पिता को रोल अदा कर रहे है जिसके लिए समाज में लड़का लड़की एक सामान हैशुरू में तो पंकज त्रिपाठी और फिल्मो की तरह ही नज़र आते है लेकिन जैसे फिल्म आगे बढती पंकज अपने किरदार में जान डाल देते है | कुल मिलकर फिल्म का सारा आकर्षण वो खीच लेते है |


इसके अलावा गुंजन सक्सेना फिल्म को देखने लायक इसकी सपोर्टिंग कास्ट बनाती है जैसे विनीत कुमार जो की गुंजन के खड़ूस ड्यूटी ऑफिसर के रोल में है| विनीत अपना रोल बड़ी शिद्दत से निभाते है वैसे जैसे गुंजन के कमांडिंग ऑफिसर बने मानव विज ने अच्छा अभिनय किया है लेकिन अंगद बेदी इस फिल्म में वेस्ट होते हुए नज़र आये ना ही उनके पास अच्छे संवाद थे ना ही उनके पास अच्छा सीन बस एक सीन है फिल्म के अंत में जहाँ गुंजन (जाह्नवी ) और वो युद के मैदान में आमने सामने होते है | 


निर्देशन

इस फिल्म का लेखन और निर्देशन की कमान शरण शर्मा के हाथो में थी | लेकिन वो कई एंगल में चूक गए | उन्होंने फिल्म में पूरा ध्यान एयरफोर्स पायलट की ट्रेनिंग की तकनीकियों पर जाएदा दिया है,जरुरी भी था| SSB सिलेक्शन से पहले फिल्म ढीली परफोर्म करती है | निजी पारिवारिक और सामाजिक संघर्ष के बावजूद गुंजन सक्सेना ने देश के लिए पहली महिला पायलट होने का गोरव प्राप्त जिसे परदे उतारने की जिम्मेदारी शरण शर्मा की थी जिसे वो पूरा नहीं कर पाते है |

सच मईने में वो इस फिल्म को सम्भाल नहीं पाए | अगर वो जाह्नवी की जगह किसी टेलेंटेड एक्ट्रेस को चांस देते तो बात कुछ और ही होती | फिल्म ना तो देशभक्ति की भावनाएं जगाती हैं, और ना ही गुंजन सक्सेना के संघर्ष को ठीक से प्रदर्शित कर पातीं है |

हालाँकि फिल्म में कुछ एक सीन्स आपको अछे बन पड़े है जिनके सहारे आप 2 घंटे बिता सकते है | तकनीकी रूप से भी फिल्म में कोई कमी नहीं है| सिनेमैटोग्राफी भी काफी अच्छी है | खासकर कारगिल वॉर के सीक्वेंस को जॉर्जिया में रीक्रिएट किया गया, जहां के एरियल शॉट्स अच्छे लगते है| कुल मिलकर मानुष नंदन का कैमरा वर्क बेहतरीन है |

मेरे विचार


पिछले हफ्ते अमेज़न प्राइम विडियो पे विद्या बालन अभिनीत फिल्म शकुंतला देवी रिलीज़ हुई थी,जो शकुंतला देवी की रियल लाइफ पर बेस्ड थी |अगर इस फिल्म को उसके मुकाबले में देखे तो गुंजन सक्सेना फिल्म काफी वीक साबित होती है |'शकुंतला देवी के किरदार को विद्या बालन अपने ही अंदाज़ में परदे जीवंत कर देती है लेकिन यहाँ जाह्नवी गुंजन सक्सेना जैसी वीर और बहादुर महिला के शोर्य को परदे पर फीका कर देती है | कुल मिलकर ये फिल्म सतही तौर पे ही बनायीं गयी है इस फिल्म में और मेहनत की ज़रूरत थी |