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एंटरटेनमेंट तडके के साथ विद्या बालन का शानदार अभिनय फिल्म को उत्कृष्ट बना देता है

Shakuntala Devi Film Review:एंटरटेनमेंट तडके के साथ विद्या बालन का शानदार अभिनय,जीनियस शकुन्तला देवी बायोग्राफी को उत्कृष्ट बना देता है हालाँकि फिल्म को मैलोड्रामेटिक ट्रीटमेंट दिया है जिसे विद्या अपने अभिनय से सम्भाल लेती है | शकुंतला देवी (Mathematical genius shakuntala Devi) बायोग्राफी फिल्म महिलाओं के अधिकारों की आवाज़ को बुलंद करती है| आइये जानते और क्या खास है इस फिल्म में 

एंटरटेनमेंट तडके के साथ विद्या बालन का शानदार अभिनय फिल्म  को उत्कृष्ट बना देता है

Shakuntala Devi Full Review: बायोग्राफी फिल्मो को लार्जर कैनवास पर उतरना हर एक की बस की बात नहीं है लेकिन यहाँ निर्देशक अनु मेनन शकुंतला देवी की रियल लाइफ को परदे पे उतरने में कामयाब होती है|

हालाँकि फिल्म को मनोरंजक बनाने के लिए अनु ने मेलोड्रामा का सहारा लिया जिसे विद्या बालन जैसी बेहतरीन अद्कारा ने बखूबी ढंग से संभाला है,जो कही भी ओवर नहीं लगा क्यूंकि शकुंतला के किरदार को अपने ही अंदाज़ से निभाया है|


शकुंतला देवी फिल्म की कहानी पकड़ बनाने में थोड़ा समय लेती है जिस कारण से फिल्म शुरू में थोड़ी स्लो हो जाती है लेकिन वो स्क्रिप्ट की डिमांड लगती है |जैसा की मैंने आपको बताया है की रियल कहानी को जस्टिफाई करने के लिए करना पड़ता है | 

31 जुलाई को विद्या बालन स्टारर शकुंतला देवी (Shakuntala Devi) एमेजॉन प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हो गयी| मैथमेटीकल जीनियस शकुंतला देवी की बायोग्राफी के जरिये निर्देशक अनु मेनन ने ये दिखने की कोशिश की है की किसी औरत के रूप में  एक जीनियस होना समाज में स्वीकार्य योग नहीं होता | यहाँ तक की खुद उसकी लड़की के लिए भी मैथ्स अभिशाप लगता है |


फिल्म में शकुंतला देवी का नार्मल लाइफ से जीनियस बनने तक का सफर दिखाती है | लेकिन वर्ल्ड फेमस, ग्रिनीज बुक रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने वाली ह्यूमन कम्पूटर शकुंतला देवी को इसकी क्या कीमत चुकानी पड़ती है ये फिल्म इस को बयां करती है | कुल मिला कर फिल्म को एक बार ज़रूर देखनी चाहिए | 



शकुंतला देवी फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी शुरू होती है अनुपमा बेनर्जी (सान्या मल्होत्रा) से शुरू होती है वो भी जब वो लन्दन कोर्ट में अपनी माँ शकुंतला देवी (विद्या बालन) के खिलाफ क्रिमनल केस करने जा रही है | वो भी सेरीयास एलिगेसन के तहत | कोर्ट में आमने सामने अनुपमा और शकुंतला देवी जब आते है तो फिल्म फ़्लैश बेक में जाती है |

फिल्म 1934  के बैंगलोर (आज का परिवर्तित नाम बेंगलुरु) के के छोटे से गाँव में जन्मी शंकुतला देवी के मैथ के गॉड गिफ्टेड ज्ञान को उसके अप्पा (प्रकाश बेलावाडी ) ने बचपन में समझ लिया था |गरीबी के चलते शकुंतला स्कूल पढने नहीं गयी, लेकिन स्कूल दर स्कूल और शहर दर शहर मैथ्स के शोज परफोर्मेंस किया करती थी | 

जिससे उसके अप्पा को अच्छे खासे पैसे मिलने लगते है | अब छोटी शकुन्तला की कमाई से घर चलने लगता है | लेकिन एक दिन उसकी बड़ी बहन जो अपाहिज है उसका निधन हो जाता है तब वो अपनी अम्मा से पूछती है मेरी कमाई जाती कहाँ है उस पैसो से अच्छा इलाज हो सकता था लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता | इस घटना के बाद से शकुन्तला अपनी अम्मा और अप्पा से नफरत करने लगती है | 

एक बार वो अपने अप्पा (प्रकाश बेलावाडी ) से स्कूल पढने जाने के लिए कहती है लेकिन अप्पा कहते “तू क्या पढ़ने जाएगी तू एक दिन सबको पढ़ायेगी”  ऐसा होता भी है वो एक दिन अपने मैथ्स के चलते देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में ह्यूमन कंप्यूटर के नाम से मशहूर हो जाती है|

शकुंतला की जिंदगी में एक आईएएस अफसर परितोष(जीशु सेनगुप्ता) की एंट्री होती है| शकुन्तला को उनसे प्यार होता है और फिर उनकी जिंदगी में आती है उनकी बेटी अनु (सान्या मल्होत्रा)| सब कुछ नार्मल चलता है लेकिन शकुंतला फिर से मैथ्स के शोज करने लगती है | और वो फिर से पूरी दुनिया में धमाल मचा देती है |

लेकिन शकुंतला देवी फिल्म की कहानी साधारण सी शकुंतला के जीनियस के सफर को तो दिखाती है लेकिन जीनियस बनने के बाद एक नार्मल लाइफ न जी पाने के दुख को भी बताती है |शकुंतला के मैथ्स के चलते उसकी लड़की अनुपमा (सान्या मल्होत्रा) और पति परितोष बनर्जी (जीशु सेनगुप्ता ) उसे छोड़कर चले जाते है | अकेले इस मुकाम तक पहुचने वाली शकुन्तला देवी फिर से अकेली हो जाती है|

लेकिन ऐसी क्या वजह थी की अनुपमा बनर्जी शकुंतला पर क्रिमनल केस कर रही है? इस सवाल का जवाब सिर्फ आपको फिल्म देख कर ही मिलने वाला है |

क्या खास है इस फिल्म में और क्यं देखना चाहिए?

सबसे पहले ये फिल्म आपको जरुर देखनी चाहिए ,एक औरत जिसने उस समय अपना मक़ाम खड़ा किया जिस समय औरतो को सिर्फ घर की चौखट के अन्दर काम करने की इज्जात थी| तब उसने कई अवार्ड अपने नाम किये इतना ही नहीं अपने वतन का नाम भी किया | और उन्हें ह्यूमन कम्पूटर की उपाधि मिली |

विद्या बालन ने इस फिल्म से अपनी जबरदस्त वापसी की है| वो शकुंतला देवी के किरदार में पूरी तरह रंगी हुई नजर आ रही हैं| उन्होंने कभी डीप स्टडी की है शकुंतला के किरदार को लेकर तभी तो जहाँ विद्या ने अपना वजन कम किया यंग शकुंतला के लिए | उनके मेकअप की बात करें या फिर चाल ढाल की, सभी मानकों पर विद्या ने शानदार काम किया है|

निर्देशक अनु मेनन ने 2 घंटा 10 मिनट में शकुंतला देवी के खास अनछुए पहलू को इस फिल्म में रखा है | इसलिए फिल्म बोरिंग नहीं लगती है |
इस फिल्म में माँ और बेटी के रिश्तो में मैथ्स कैसे खटास लाती है इस पर भी अच्छे से फोकस किया गया है | शकुंतला अच्छी माँ से कैसे बुरी माँ बन जाती है ?

शकुंतला देवी के बारे में ये ही कहूँगा की एक हलकी फुलकी मजेदार फिल्म है| इसमें आपको एक हिंदी फीचर फिल्मों में मिलने वाले सभी गुण मिलेंगे| ये फिल्म कभी आपको हँसाएगी तो कभी इमोशन में रुलाएगी भी, साथ ही जिंदगी को अलग तरीके से देखने का नजरिया भी सिखलाती है |

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