बॉबी देओल की 'Class Of 83' मूवी देखने से पहले एकबार ज़रूर पढ़े

Class Of 83 Movie Review:मुंबई अंडरवर्ल्ड की पुरानी कहानी में नए किरदारों के साथ बनी फिल्म Class Of 83 अपनी स्क्रिप्ट की खामियों के चलते क्लास होने से चूक जाती है |


बॉबी देओल की 'Class Of 83' मूवी देखने से पहले एकबार ज़रूर पढ़े


Class Of 83 मूवी कास्ट एंड क्रू

अवधि -1 घंटा 34 मिनट
OTT प्लेटफार्म –नेत्फ्लिक्स(Netflix)
कलाकार- बॉबी देओल, अनूप सोनी, जॉय सेनगुप्ता, विश्वजीत प्रधान, पृथ्विक प्रताप, समीर परांजपे, भूपेंद्र जाड़ावत, हितेश भोजराज, निनाद महाजनी आदि।
DIRECTOR (निर्देशक)- अतुल सभरवाल
PRODUCER (निर्माता)- शाह रुख़ ख़ान, गौरी ख़ान,( Red Chilies Entertainment),गौरव वर्मा। Star (स्टार) 3 स्टार (⭐⭐⭐)

Class Of 83 मूवी समीक्षा


मुंबई अंडरवर्ल्ड की पुरानी कहानी में नए किरदारों के साथ बनी फिल्म Class Of 83 अपनी स्क्रिप्ट की खामियों के चलते क्लास होने से चूक जाती है बॉबी देओल का नासिक पुलिस ट्रेनिग केंद्र के डीन के किरदार में है| उनका किरदार और अभिनय दोनों मजबूत है,लेकिन डेढ़ घंटे की फिल्म की कहानी में उन्हें वो स्पेस नहीं मिला जितना उनके स्टूडेंट (ट्रेनिग कॉप्स ) को मिला

बाकि फिल्म 'Class Of 83'मुंबई और अंडरवर्ल्ड के रिश्ते को बयां करती है,जिसे हम पहले भी कई फिल्मो में देख चुके है |अब इस विषय पर फिल्म बनाना  थोडा जोखिम भरा काम होता है | पब्लिक गैंगवार ,एनकाउंटर और राजनीति जैसे सब्जेक्ट देख कर ऊब चुकी है यही  कारण है की बॉबी देओल की डिजिटल डेब्यू फिल्म थोडा निराश करती हैबॉबी की पुलिस ट्रेनिग केंद्र के डीन के किरदार में उनकी मेहनत स्क्रीन पर दिखती है ,लेकिन उनके सामने दमदार विलेन का ना होना फिल्म का सबसे बड़ा वीक पॉइंट है |

लगता है निर्देशक अतुल सभरवाल बॉबी के किरदार पर काम करना भूल गए | या फिल्म को समाप्त करने की जल्दी थी, समझ में नहीं आता जब तक फिल्म के विषय से दर्शक जुड़ने की कोशिश करता भी तब फिल्म का अंत हो जाता है | फिल्म के आखरी 30 मिनट में बॉबी देओल को एक्टिव मोड़ में देख पाएंगे

बाकी पूरी फिल्म में विजय सिंह (बॉबी देओल ) नाशिक पुलिस अकादमी के डीन के 5 छात्र 1. प्रमोद शुक्ला (भूपेंद्र जाड़ावत )2.विष्णुवर्दे (हितेश भोजराज )3. जनार्दन सुर्वे (पृथ्विक प्रताप)4.लक्ष्मण जाधव (निनाद महाजनी ) और 5. असलम ख़ान (समीर परांजपे) ही फिल्म छाये रहते है | खास कर फिल्म में पुलिस ट्रेनिग का सेगमेंट आपको थोडा एन्जॉय देगा|

ये कहना गलत नहीं होगा की बॉबी ने अपने किरदार के लिए काफी मेहनत की है,वो स्कीन पर नज़र भी आती है लेकिन  उसे निर्देशक अतुल सभरवाल भुनाने में कामयाब नहीं हो पाए है बाकि सपोर्टिंग कास्ट फिल्म में हावी रहती है जिन्होंने अपने अभिनय से फिल्म में पकड़ भी बना कर रखी है लेकिन इस चक्कर में बॉबी के साथ नाइंसाफी हो गयी |

वैसे फिल्म को निर्देशन अतुल सभरवाल फिल्म की कहानी को बोझिल होने से बचा कर रखा है | साथ ही 83 के बम्बई को परदे पर उतने में कामयाब होते है | यहाँ पर फिल्म के सिनेमाटोग्राफर मारिओ पोलिअक की तारीफ करनी होगी जिन्होंने 83 के बम्बई दिखने में कोई कसार नहीं छोड़ी है | फिल्म में विजू शाह का म्यूजिक भी अच्छा है जो फिल्म को सपोर्ट करता है |

सच में अगर फिल्म 'Class Of 83 फिल्म में कोई सच में तारीफ का हक़दार है तो वो है नितिन बैद और मानस मित्तल की एडिटिंग जिन्होंने पुरानी गीसी पिटी कहानी को बोरिंग होने से बचाया है | जिस कारण से फिल्म आपको बोझिल नहीं लगेगी |


Class Of 83 मूवी कहानी

   

फिल्म की कहानी एस. हुसैन ज़ैदी के नॉवल 'क्लास ऑफ़ 83- द पनिशर्स ऑफ़ मुंबई' से ली गयी है। इसलिए शायद लेखक टीम अभिजीत शिरीष देशपांडये (स्क्रीनप्ले )अतुल सबरवाल (संवाद ) के पास जायदा एक्सपेरिमेंट करने का मौका नहीं था | लिहाजा फिल्म की अवधी आपको अखरेगी |

फिल्म की कहानी शुरू होती है नासिक के पुलिस ट्रेनिग केंद्र से जहाँ विजय सिंह (बॉबी देओल ) इस केंद्र के डीन है | अच्छा आई पी एस ऑफिसर होते हुए भी उसे सज़ा के तौर पर पुलिस एकेडमी का डीन बनाकर भेज दिया जाता है। विजय सिंह निजी ज़िंदगी में एक हारा हुआ इंसान है। अपने परिवार से ज़्यादा अपने फ़र्ज़ को उसने प्राथमिकता दी, मगर सिस्टम ने उसे ईनाम की जगह सज़ा दी।

लेकिन डीन विजय सिंह की ट्रेनिग सेंटर में 5 ऐसे स्टूडेंट है जो पढाई में से जाएदा प्रक्टिकल में विश्वाश रखते है |1.प्रमोद शुक्ला (भूपेंद्र जाड़ावत ),2.विष्णुवर्दे (हितेश भोजराज )3. जनार्दन सुर्वे (पृथ्विक प्रताप)4.लक्ष्मण जाधव (निनाद महाजनी ) और 5. असलम ख़ान (समीर परांजपे) इन सभी में विजय कुछ अलग गुण देखता है जो कही न कही उसके नेचर से मेल खाते है | वो उन्हें अलग से ट्रेंड करता है लेकिन जब वो ट्रेनिग ख़तम कर के असल ज़िन्दगी में आते है तो मुंबई मे एनकाउंटर की बाढ़ से आ जाती है| वो पांचो मुंबई अंडरवर्ल्ड की कमर तोड़ कर रख देते है | लेकिन एनकाउंटर के नशे में वो आपस में भीढ़ जाते है | पांचो की दोस्ती है उनकी असली स्ट्रेंथ होती है | जिसके चलते वो मुंबई अंडरवर्ल्ड के असली सरगना तक नहीं पहुच पाते है |

आगे क्या होगा क्या पांचो एक बार फिर से मिल कर मुंबई की मुंबई अंडरवर्ल्ड की गन्दगी का सफाया कर पाएंगे की नहीं ? विजय सिंह का क्या होगा क्या वो ट्रेनिंग सेंटर से बहार आकर इन पांचो को फिर एक जुट का पाने में कामयाब होगा | इसके लिए आपको नेत्फ्लिक्स पर फिल्म 'Class Of 83 देखनी होगी |


Class Of 83 फिल्म निर्देशन


अतुल सभरवाल ने अपने निर्देशन की शुरुवात अर्जुन कपूर की फिल्म औरंगजेब से की थी जिसके बाद उन्होंने यश राज की वेब सिरीज़ पाउडर का भी निर्देशन किया था |वो अनुभवी है इसलिए पुराने कंटेंट को भी क्रिस्प बनाकर देखने लायक बनाया | बॉलीवुड में पुलिस गैंगस्टर और राजनीती के गठजोड़ वाले फोर्मुले पर तमाम फिल्मे बन चुकी है | तो इस लिहाज से निर्देशक निर्देशक अतुल सभरवाल के सामने चुनौती थी जिसमे वो कामयाबी हासिल कर जाते है |  उन्होंने फिल्म की कहानी को क्रिस्प और शोर्ट रखा है | चूंकि फ़िल्म एक पीरियड नॉवल 'क्लास ऑफ़ 83- द पनिशर्स ऑफ़ मुंबई' का अडेप्टेशन है, इसलिए लेखक के पास ज़्यादा प्रयोग करने की गुंजाइश भी नहीं रही होगी। 

Class Of 83 फिल्म में अभिनय  


Class Of 83 फिल्म के ट्रेलर रिलीज़ देख कर लग रहा था की फिल्म में बॉबी देओल का जबरदस्त एक्शन औए अभिनय देखन को मिलेगा | लेकिन थोड़ी सी निराशा होती है | हालाँकि बॉबी ने अपने अभिनय तारीफ के काबिल किया है लेकिन उन्हें थोडा कम स्पेस मिला है| बल्कि इस फिल्म में पांच नए एक्टर भूपेंद्र जाड़ावत,हितेश भोजराज ,पृथ्विक प्रताप,निनाद महाजनी और समीर परांजपे अपने अभिनय से फिल्म की जान बन जाते है | पांचो ने एकेडमी में रंगरूटों से लेकर एनकाउंटर करते पुलिस अफ़सरों के ट्रांसफॉर्मेशन को इन कलाकारों ने बड़ी सहजता और कामयाबी के साथ निभाया|


Class Of 83 मूवी देखे या नहीं ?


सही माने तो ये फिल्म बॉबी देओल की कमबैक फिल्म कह सकते है | जिसमे उन्होंने दमदार एक्टिंग की है भले ही रोल कम है लेकिन जितना भी वक़्त उन्हें मिला उन्होंने अपना 100 प्रतिशत दिया है | तो अगर आप बॉबी के फैन्स है तो ये फिल्म देख सकते है | इसके अलावा अगर मुंबई के साल 83 में कैसे बम्बई में अंडरवर्ल्ड अपने पैर पसार रहा था और ये जानना है तो ये फिल्म देख सकते है | फिल्म की अवधी मात्र 1 घंटा ३४ मिनट है | जो कब गुजर जायेगा आपको पता नहीं लगेगा |