पुरानी सड़क के आगे बे-सड़क नज़र आती है सडक 2 फिल्म समीक्षा

SADAK 2 REVIEW- आलिया भट्ट की इक्षा पर पिता महेश भट्ट 21 साल  के बाद निर्देशन में  वापस लौटे,लेकिन वो अपना करिश्मा दिखाने में कामयाब नहीं हुए | इसलिए ये फिल्म इस साल की सबसे बड़ी फ्लॉप साबित हो गयी | यहाँ तक की सड़क 2 को 1 IMBD Ratings से ही संतोष करना पड़ा है | अगर आपने अभी तक ये फिल्म नहीं देखी तो देखने से पहले हमारी समीक्षा पढ़े |



पुरानी सड़क के आगे बे-सड़क नज़र आती है सडक 2, फिल्म रिव्यु

फिल्म: सड़क 2 कास्ट एंड क्रू

OTT –डिस्नी हॉट स्टार
अवधि -2.14 मिनट
कास्ट: संजय दत्त, आलिया भट्ट, आदित्य रॉय कपूर, जीशू सेनगुप्ता, मकरंद देशपांडे व अन्य
राइटर –शाहीन भट्ट
निर्देशक: महेश भट्ट

सड़क 2 समीक्षा

एक कहावत है की सर मुडाते ही ओले पड़े,ऐसा ही कुछ हाल सडक 2 फिल्म के साथ हुआ| एक तरफ जहाँ सुशांत के फैन्स भट्ट फैमली से खासा नाराज़ चल रहे | ऐसे समय पर सड़क 2 रिलीज़ हुई जिसको सभी ने सिरे से नकार दिया | ऐसा नहीं की फिल्म बहुत अच्छी है जिसे जबरदस्ती ख़राब रिव्यु मिल रहे है| 

तो आपको बता दे ऐसा बिलकुल नहीं है ये फिल्म आपका समय तो ख़राब करती है साथ कमजोर कहानी और अभिनय पर आपको गुस्सा आना लाजमी है | चलिए अब फिल्म के बारे में और बात कर लेते है 21 साल बाद महेश भट्ट निर्देशन में वापस लौटे है जिनसे बड़ी उम्मीदे थी की सड़क 2 ,साल 1991 में आई संजय दत्त और पूजा भट्ट की सडक जैसी हिट साबित होगी तो ऐसा बिलकुल नहीं लगता| 

इस फिल्म को अभी तक की सबसे खरब IMBD रेटिंग मिली है| 1 रेटिंग के साथ इस फिल्म को अभी तक 2900 दर्शको ने ही देखा है | जिसमे से ज़्यादातर पत्रकार,मूवी ब्लॉगर और बाकी बचे इनके रिश्तेदार ही रहे होंगे। सड़क 2 को ओटीटी प्लेटफ़ार्म की सबसे बड़ी फ़्लॉप फिल्म बताया जा रहा|


चलिए अब थोड़ी सी फिल्म के बारे में भी बात कर लेते है |आलिया भट्ट (Alia Bhatt), आदित्य रॉय कपूर (Aditya Roy Kapur) और संजय दत्त (Sanjay Dutt) नेपो स्टारर फिल्म सडक-2 OTT प्लेटफॉर्म हॉट स्टार डिस्नी पर 29 अगस्त को रिलीज़ हो चुकी है |


जिसका निर्देशन महेश भट्ट ने किया है| जब इस फिल्म का ऐलान किया गया था तभी से लोग इसका इन्तेजार कर रहे थे| लेकिन ना तो शाहीन भट्ट कहानी में कुछ इंट्रेस्टिंग एलिमेंट जुटा पाई और ना ही महेश भट्ट अपने निर्देशन का पैना पन दिखा पाए | अगर संजय दत्त को छोड़ दे तो आलिया भट्ट और आदित्य रॉय कपूर अपने अभिनय के असली रंग में नहीं दिखे |


सडक 2 ऐसे सफ़र पर लेकर जाती है जहाँ कहानी पक्के रास्ते से उतारकर कच्चे रास्तो में भटक जाती है | फिल्म में कोई भी किरदार अच्छे से इस्टैब्लिश नहीं हो पाया है |


फिल्म में कोई भी किरदार आपको स्क्रीन पर रोकने में कामयाब नहीं होता है | सडक 2 फिल्म चारो खाने चित दिखाई पड़ती है ना कहानी, ना अभिनय ,ना ही निर्देशन और ना ही अच्छे संवाद | सॉंग की बात छोड़ ही देते ही क्यूंकि कोई भी गाना जेहन में जगह नहीं बना पता है |

सडक 2 की कहानी

फिल्म की शुरुवात होती है 1991 की सडक फिल्म के फ्लेश बेक सीन से जहाँ रवि और पूजा एक दूसरे के रोमांटिक सीक्वेंस दिखाए गए है| फिल्म का फ्लेश बेक आउट होता है और कहानी रियल टाइम में आती है | यहाँ दिखाया गया है की टैक्सी ड्राइवर रवि (Sanjay Dutt) की पूजा मर चुकी है | रवि अपनी पूजा को इतना प्यार करता था की उसके बिना जीना उसका मुश्किल हो गया है वो दीवानों की तरह आत्महत्या करने की कोशिश करता है|

लेकिन तमाम कोशिश के बावजूद वो अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पता इस चक्कर में उसे हॉस्पिटल भी जाना पड़ता है लेकिन वह से आने के बाद वो फिर से एक दिन अपनी जान देने की कोशिश कर रहा होता है, तभी आर्या (Alia Bhatt) की एंट्री होती है|

आर्या रवि से कहती है की उसने केलाश के लिए बुकिंग करायी है उसे केलाश जाना है लेकिन रवि उसे टालने की कोशिश करता है लेकिन वो अपनी जिद से रवि को भी मना लेती है |

रवि एक टैक्सी सर्विस चलता है | तो वही आर्या अपने परिवार से दूर भागना चाहती है ,क्यूंकि वो 21 साल की होने वाली है और उसकी माँ अपनी तमाम जायदाद की एकलौती वारिस आर्या को ही बना कर गयी थी| यही कारण है की उसके परिवार के लोगो की निगह आर्या की जायदाद पर है |

लेकिन आर्या की ज़िन्दगी में फर्जी बाबा गुरूजी (मकरंद देशपांडे)का कब्ज़ा है | गुरूजी आर्या के परिवार को होल्ड करते है जपो वो चाहते है वो ही होता है | आर्या को पता है की उसकी माँ का हत्यारा गुरूजी ही है | जिससे बदला लेने के लिए वो केलाश के सफ़र पर निकली है | लेकिन सफ़र में तमाम मुश्किले आती है जिससे उन्हें रवि बचाता है |

अब क्या आर्या अपनी माँ का बदला ले पाएगी? इसे देखने के लिए आप इस फिल्म को देख सकते है अगर देखना चाहे ? वैसे कोई जरुरी नहीं की आप ये फिल्म देखे 

अभिनय

पूरी फिल्म में संजय दत्त (Sanjay Dutt) ही एकलौते स्टार है जिन्होंने थोड़ी बहुत एक्टिंग की है बाकी लगता है सबने टाइम पास किया है | या तो उनके किरदार को अच्छे से रचा नहीं गया है | या फिर उसे निर्देशक महेश भट्ट स्क्रीन पर अच्छे से उतरने में कामयाब नहीं हो पाए है |

कुछ तो गड़बड़ है क्यूंकि संजय दत्त  के कुछ सीन्स में छोड़ दिया जाए तो अधिकतर एक्टर पूरी फिल्म में एक्सप्रेशनलेस रहते हैं| आलिया भट्ट (Alia Bhatt) और आदित्य रॉय कपूर पूरी फिल्म में लॉस्ट नजर आते हैं| फिल्म को देख कर ऐसा लगता ही नहीं है कि यह कोई फिल्म चल रही है| यहाँ तक की बेहद कमजोर है मकरंद देशपांडे का फर्जी बाबा का किरदार जितनी मेहनत बाबा के गेटअप में की है काश उतनी मेहनत फिल्म को लिखने में कर लेते |

देखे या नहीं ?

कुल मिलकर अगर टाइम है तो इस फिल्म को देखे वरना स्किप कर सकते है कोई फर्क नहीं पड़ेगा अगर फिर भी मन ना माने तो पूरी सड़क देख ले |