गरीब बच्चे का म्यूजिशियन बनने का सफर दिखाती है ZEE5 की अटकन चटकन फिल्म

Atkan Chatkan Movie (अटकन चटकन मूवी) फिल्म की बेस कहानी तो अच्छी है| लेकिन सही ढंग से गढ़ा नहीं गया है| इसलिए कमजोर बिखरी हुई कहानी और किरदारों के साथ अटकन चटकन थोड़ी बेअसर हो जाती है| 

गरीब बच्चे का म्यूजिशियन बनने का सफर दिखाती है ZEE5 की अटकन चटकन फिल्म


समीक्षा

म्यूजिक वर्ल्ड में अपना मकाम हासिल कर चुके ए.आर रहमान (A.R RAHMAN) भी फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रख चुके है | उनकी पहली म्यूजिकल थीम पर बेस्ड अटकन चटकन फिल्म (ZEE5 film Atkan Chatkan) ZEE5 पर रिलीज़ हो चुकी है | ये फिल्म बच्चो को जेहन में रख बनाई गयी है | जिसमे दिखाया गया है,कैसे कुछ गरीब बच्चे के अपने अन्दर के छुपे म्यूजिशियन बनने के छोटे से सपने को साकार करते है |

अटकन चटकन फिल्म का निर्देशन ने शिव हरे (Shiv Hare Atkan Chatkan Movie Director) ने किया है | लेकिन शिव हरे की अटकन चटकन फिल्म कहानी,अभिनय,और निर्देशन के विभाग में कमजोर साबित होती है |अटकन चटकन फिल्म की बेस्ड लाइन स्टोरी काफी अच्छी है लेकिन फिल्म का बिखरा हुआ स्क्रीनप्ले इसे 2 घन्टे में काफी उबाऊ बना देता है | 

इसके अलावा फिल्म में कमजोर किरदार,और म्यूजिक भी अपना असर नहीं छोड़ पाते है| कुल मिलकर फिल्म की कहानी इमोशन जगाने में कामयाब नहीं होती | जिसकी खास वजह फिल्म के लीड एक्टर नादस्वरम भी है | वो अपने अभिनय से कोई खास कमाल नहीं दिखा पाए | लिडियन नादस्वरम के अलावा फिल्म में यश राणे, सचिन चौधरी, तमन्ना दीपक, अमितृयान, जगदीश राजपुरोहित भी है | जिनका अभिनय लीड एक्टर पे भरी पड़ता है |


ऐसा लगता है की निर्देशक शिव हरे ने अटकन चटकन को 5 बच्चो के कछे कंधो पर छोड़ दिया है | जिसमे कुछ ही अभिनय में कमाल दिखा पाए | अब बात करे फिल्म के म्यूजिक की तो संगीत प्रधान फिल्म के होते हुए भी अटकन चटकन फिल्म का संगीत भी खास नहीं है |  


अटकन चटकन कहानी

अटकन चटकन फिल्म की कहानी उतर प्रदेश के झाँसी में रहने वाले गरीब बच्चे गुड्डू की है, जिसका संगीत के प्रति लगाव इस बात से ही लगाया जा सकता है की वो संगीत हर चीज से ढूढता है और उसका सपना है की वो तानसेन संगीत महाविद्यालय से संगीत की शिक्षा ले |

गुड्डू गरीबी के चलते वो चाय की दुकान पे काम करता है लेकिन वो संगीत सीखने के लिए कोई भी लम्हा नहीं छोड़ता है | उसके माता-पिता काफी समय पहले ही अलग हो चुके हैं लिहाजा बड़ा होने के कारण गुड्डू के ऊपर अपनी छोटी बहन की परवरिश की भी जिम्मेदारी है| क्यूंकि गुड्डू का पिता शराबी है और वो जो भी कमाता है,वह शराब में उड़ा देता है|

एक दिन गुड्डू चाय देने एक ऑर्केस्ट्रा ग्रुप के पास जाता है जहाँ वो काम मागता है | तो वहाँ उसे नौकरी का दिलासा दे दिया जाता है | इसके बाद वो चाय की दुकान पर नौकरी छोड़ कर वहां पहुचता है लेकिन उसे भगा दिया जाता है | इसके बाद घर चलाने के लिए वो एक कबाड़ी के यहाँ काम करने लगता है |

जहाँ उसके सपने को और हवा मिल जाती है वो वहां के रखे कबाड़ से नए संगीत की खोज करने लगता है | जिसके बाद गुड्डू का एक दोस्त माधव उसे म्यूजिक बैंड बनाने की सलाह देता है| फिर इस बैंड में छुट्टन और मीठी भी जुड़ जाते हैं, जो नाच-गाकर लोगों का दिल बहलाते हैं और इसके बदले में उन्हें कुछ पैसे मिल जाते हैं|

इस बीच तानसेन संगीत महाविद्यालय के प्रिंसिपल अपने कॉलेज में इंटर स्टेट म्यूजिक कॉम्पिटिशन में अपने कॉलेज के कई वर्षों से खराब प्रदर्शन से काफी चिंतित हैं| एक दिन उनकी नज़र सभी बच्चो पर पड़ती है | और वो उन बच्चो को इंटर स्टेट म्यूजिक कॉम्पिटिशन में अपने स्कूल से उतरना चाहते है |

लेकिन तमाम मुश्किलें उन गरीब बच्चो का पीछा कर रही है जैसे छुट्टन और मीठी एक भीख मांगने वाले गैंग के बच्चे है | तो वो कैसे उनके चुंगल से निकल पाएंगे ? और क्या गुड्डू का सपना कभी पूरा हो पायेगा ? क्या इं गरीब बच्चो का बैंड इंटर स्टेट म्यूजिक कॉम्पिटिशन जीत पायेगा ? पूरी फिल्म की कहानी इसी के इर्द-गिर्द ही घुमती है | अगर इन तमाम सवालो का जवाब जानना है तो आपको अटकन चटकन फिल्म देखनी पड़ेगी |