साइंस फैंटेसी पर आधारित कार्गो फिल्म यमराज के नए स्वरूप को दिखती है|

Netflix Cargo Film: पुराने घिसेपिटे हिन्दी फिल्म फॉर्मूले से हटकर कार्गो फिल्म साइंस फैंटसी पर आधारित है| जिसमे दिखाया गया है कि पुष्पक 634-A के एस्ट्रोनॉट राक्षस कैसे मनुष्य मरने के बाद उन्हे पुनर्जन्म दिलवाने का काम करते है | आइए जानते और क्या खास है विक्रांत मेसी और श्वेता त्रिपाठी की कार्गो फिल्म मे?

साइंस फैंटेसी पर आधारित कार्गो फिल्म यमराज के नए सावरूप को दिखती है|

समीक्षा

आज तक किसी को भी नहीं पता कि मनुष्य मरने के बाद कहाँ जाता है?क्या होता है उसे साथ?क्या वाकई यमराज उसे साक्षात लेने आते है ? ऐसा हमने अक्सर सुना है देखा नहीं| इसी सोच को लेखक-निर्देशक आरती कदव ने साइंस फैंटेसी के रूप मे दिखाने की कोशिश की है| जहां यमराज किसी काले भैंसे पर बैठकर हाथों मे गदा लिए किसी के प्राण हरने नहीं आते है |

बल्कि यहाँ यमराज की आधुनिक PDTS (पोस्ट डेथ ट्रांजिशन सर्विसेज़) काम करती है | जो मनुष्य मर जाते है उन्हे PDTS के लिए स्पेस मे मौजूद अंतरिक्ष स्टेशन पुष्पक 634-A मे भेजा जाता है| इस तरह से यमराज की नई कार्गो प्रणाली काम करती है| जिसे देखना काफी दिलचस्प लगेगा|

हालांकि ये फिल्म काफी लोगों के सर के ऊपर से निकालने वाली है लेकिन निर्देशक आरती कदव ने नए प्रयोग की सरहना करनी चाहिए|उन्होंने ऐसे वक़्त मे ये फिल्म लाई है जब बाइयोपिक और क्राइम सस्पेंस फिल्मों और वेब सीरीज की भरमार लगी हुई है | ऐसे मे Netflix की कार्गो फिल्म (Cargo Film) देखना आपको थोड़ा सा नया अनुभव देगा|

बस फिल्म की 1 घंटा 52 मिनट के लेंथ आपको थोड़ी लंबी लग सकती है|बाकी ये एक प्रयोग्यकात्मक फिल्म है जो आपको एक कल्पनालोक दुनिया मे ले जाती है | जहां जीवन मरण के रहस्य से पर्दा उठाने की कोशिश की है |


फिल्म मे लेखक निर्देशक आरती कदव के साथ विक्रांत मैसी, श्वेता त्रिपाठी और नंदू महादेव के अभिनय की भी तारीफ करनी होगी,जिन्होंने अपने अभिनय से फिल्म को रोचक बनाए रखा है | कार्गो फिल्म के सैट अच्छे डिजाइन,आर्ट डायरेक्शन और वीएफएक्स कहानी को सपोर्ट देते है|

कहानी

फिल्म की कहानी का आधार पौराणिक कहानियों से लिया गया है | जिसमे कहा जाता है की इंसान मरने के बाद स्वर्ग या नरक मे जाता है लेकिन कार्गो फिल्म मे ऐसा कुछ नहीं दिखाया गया है | इसमे केवल उस पक्ष को दिखाया गया है जब पृथ्वी पर जब मनुष्य मारता है तो वो यमराज की आधुनिक PDTS (पोस्ट डेथ ट्रांजिशन सर्विसेज़) के जरिए अंतरिक्ष के स्पेस स्टेशन पर पहुंचता है|

फिल्म की कहानी साल 2027 से शुरू होती जहां दिखाया गया है की इंसान ने इतनी तरक्की कर ली है कि वो मार्श और मून से आगे निकाल कर जुपिटर तक पहुँच गया है | लेकिन धरती पर सब कुछ पहले जैसा ही है |

जीवन मरण,प्यार मोहब्बत और रिश्तों मे धोखा,पटररियों पर दौड़ती लोकल ट्रेन,और बेजार दिवारे जिसमे उखड़ते पलस्तर इत्यादि| जिसमे धरती पर एक रामचन्द्र नेगी (Biswapati Sarkarको दिखाया गया है जिसका दावा है की वो अकेलेपन का डेटेक्टिव है| जो आपके इन सभी परेशानियों से आराम दिला देगा|

तो वही अंतरिक्ष मे PDTS (पोस्ट डेथ ट्रांजिशन सर्विसेज़) को देने वाला स्पेस स्टेशन पुष्पक 634-A है | जिसके करता धरता एस्ट्रोनॉट राक्षस प्रहस्थ (विक्रांत मैसी) है जिसका रोज का काम यही है कि जो इंसान मरकर कर ऊपर पहुंचता है उन्हे पुनर्जनम के लिए तैयार करना| जो इंसान मारकर ऊपर आता है उसे यहाँ की भाषा मे कार्गो कहते है |


पुनर्जनम से पहले उनको दर्द और चोटों को हील करने के बाद उनकी मेमोरी इरेज कर दी जाती है | ये सारा काम एस्ट्रोनॉट राक्षस प्रहस्थ (विक्रांत मैसी)न पिछले 75 सालों से अकेले ही करते या रहे है | जिनकी सही उम्र का अनुमान लगाना मुश्किल है क्यूंकी ये कहानी एक काल्पनिक काल की है | वो हमेशा से इंटरप्लेनेटरी स्पेस ऑर्गनाइजेशन सेंटर पर एक हेल्पर की डिमांड करते आए तो उनकी हेल्प के लिए युविष्का शेखर (श्वेता त्रिपाठी) को भेजा जाता है | 

धरती पे की युग बीत चुके है एस्ट्रोनॉट राक्षस प्रहस्थ (विक्रांत मैसी) जन्म-मृत्यु के कई चक्रों को पूरा कर चुके है | अब मर कर आने वाले लोग उन्हे पहचानने लगे है |जिसकी सूचना वो इंटरप्लेनेटरी स्पेस ऑर्गनाइजेशन के नीतिज्ञ सर (Nandu Mahadev) को देता है| वो कहते की अब तुम्हारा रिटायरमेंट का समय आ गया| अब उसे वापस धरती पे आना होगा| 

स्पेस स्टेशन पुष्पक 634-A पर प्रहस्थ और युविष्का साथ मे काफी समय बिताते है दोनों मे खटपट भी होती है लेकिन दोनों के बीच ईमोशनल बान्डिंग से बन जाती है | जिसके बाद प्रहस्थ को धरती पर लौटना मुश्किल लगता है क्योंकि उसकी भावनाएं अपने काम से जुड़ी हैं| इसलिए वो वापस आने का फैसला कर लेता है | लेकिन क्या वो वापस आ पाएगा की नहीं ? इस सवालों के अलावा बिना भैंस के यमराज की दुनिया देखनी हो तो आप को नेटफलिक्स पर कार्गो देखनी होगी |

क्या खास है कार्गो मे

लेखक-निर्देशक आरती कदव के ये डेब्यू फिल्म है| जिन्होंने अपनी राइटिंग और निर्देशन से पौराणिक मिथक को नए ट्विस्ट एंड टर्न के साथ पेश किया है | कार्गो की आलोकीक दुनिया भले ही काल्पनिक लगती है लेकिन विज्ञान,अंतरिक्ष विज्ञान के साथ आत्मा-परमात्मा और जीवन-मृत्यु का दर्शन का सफर मजेदार है| सीमित संशधन होते हुए भी इस फिल्म का कंटेन्ट रोचक है जो आपको बांधे रखे रहने के लिए काफी है|

कुछ सीन्स है जो आपको मरने के बाद का दर्द भी महसूसू कराएंगे| जैसे अचानक मर जाने के बाद जब वो स्पेस स्टेशन पर पहुँच कर अपने परिवार वालों से बात करना चाहते है| उनको पता ही नहीं की वो मर चुके है| इन सब के बावजूद वहा मौजूद राक्षस जिनमे कोई ईमोशन नहीं है| वो तो बस अपना पुनर्जनम के प्रोसेस के काम करते है | ये भाग वाकई आकर्षक है और नया है |

ऐसा नहीं की फिल्म सीरीअस मुद्दे को ही फोकस करती है बल्कि कई जगह हल्के फुल्के व्यंग आपके चेहरे पर हल्की मुस्कान भी पैदा कर जाती है |

कार्गो देखे या नहीं ?

अगर आप क्राइम सस्पेंस और बायोपिक से ऊब गए है और कुछ नया देखना चाहते है| इसके अलावा आपको साइंस फिक्शन पसंद है तो कार्गो फिल्म आपके लिए है| लगभग 1 घंटे 52  मिनट की यह फिल्म आपको अंत तक बांधे रहने मे कामयाब होगी|