सीरियस मेन ऐसे बच्चे की कहानी जिसका बचपन पिता के सपनों की भेट चढ़ जाता है

Serious men Review:नेटफलिक्स की सीरियस मेन फिल्म ऐसे अनगिनत बच्चों की कहानी कहती है,जिनका बचपन अपने माता-पिता की महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ जाता है |


सीरियस मेन ऐसे बच्चे की कहानी जिसका बचपन पिता के सपनों की भेट चढ़ जाता है

सीरियस मेन फिल्म कास्ट एण्ड क्रू

निर्देशक- सुधीर मिश्रा

प्लेटफॉर्म- नेटफ्लिक्स

अवधि -2 घंटा

कलाकार- नवाज़उद्दीन सिद्दीक़ीइंदिरा तिवारीअक्षत दासनासरसंजय नर्वेकरश्वेता बसु प्रसाद आदि।

स्टार- ⭐⭐⭐ (तीन स्टार)



बचपन उस सफेद कागज़ की तरह होता है जिसमे जो चाहे लिखे वो बच्चे के जेहन मे घर कर जाता है| सीरियस मेन (Serious men) फिल्म भी ऐसे एक पिता पुत्र की कहानी कहती है जहां महत्वाकांक्षी पिता अपने सपनों के तले बच्चे का बचपन रौंद देता है| हल्के लिहाज से ही सही लेकिन निर्देशक सुधीर मिश्र और नवाजुद्दीन सिद्दीकी अभिनीत फिल्म असल मे बहुत बड़ी बात कह जाती है | आइए जानते है क्या और क्या खास है नेटफलिक्स की सीरियस मेन मे ?


सीरियस मेन समीक्षा

निर्देशक सुधीर मिश्रा की फ़िल्म सीरियस मेन (Serious men) राइटर मनु जोसेफ की किताब सीरियस मेन पर आधारित है| ( Serious Men is based on the novel by the same name of Manu Joseph) इसलिए कहानी को कहने मे  सुधीर मिश्रा को कोई दिक्कत पेश नहीं आई होगी | वैसे कहानी के किरदारों को पहले भी आपने कही देखा सुना जरूर होगा | बस आपने इग्नोर कर दिया होगा | उसके पीछे के दंश को महसूसू नहीं किया होगा |

जिसे निर्देशक सुधीर मिश्रा (Director sudhir mishra) ने सीरियस मेन के जरिए पेश करने की कोशिश की है | और उसमे वो काफ़ी हद तक सफल भी होते है | मोटे तौर पे देखा जाए तो कहानी एक साधारण महत्वाकांक्षी पिता की है जो अपने सामान्य बुद्धि वाले बच्चे को समाज मे जीनियस सिद्ध करना चाहता है | जिसके लिए वो एड़ी चोटी का जोर लगता है | यही से कहानी खास हो जाती है| जिसके चलते आप मे अंत तक बंधे रहते है |

तमिलनाडु के एक छोटे से गांव के दलित परिवार से ताल्लुक रखने वाला अय्यन मणि के किरदार को नवाज़उद्दीन सिद्दीक़ी (Nawazuddin Siddiqui) ने बहुत ही खूबसूरती से निभाया है| उन्हे स्कीन पर देख कर लगता है वाकई एक समाज मे दबा हुआ वर्ग कैसे अपने बच्चे को वो सब कुछ देना चाहता है जिसके अभाव मे उसका बचपन गुजरा था |

एलिट क्लास के बुद्धिजीव वर्ग की बराबरी के चक्कर मे वो अपने बच्चे का बचपन दाव पर लगा देता है | मीडिया,टेलेंट शो,और राजनीति के चक्कर मे अय्यन मणि और उसका 6 साल का बच्चा आदि मणि (Akshath das) मे फंस जाते |

कहानी को वास्तविक रूप देने के चक्कर मे कई जगह संवादों मे गालियों का प्रयोग किया गया है तो कही कुछ दृश्य ऐसे है जिन्हे बच्चे देख नहीं सकते| हालांकि ये सब किरदार की मांग हो सकती है लेकिन बच्चों के भविष्य की बात की जा रही है तो इस फिल्म को बच्चों के हिसाब से ही बनाना चाहिए था |


सीरियस मेन की कहानी

सीरियस मेन असल मे दो बड़े स्कैम्स पर आधारित है पहला स्कैम्स कर रहा है एक एक पिता अय्यन मणि (Nawazuddin Siddiqui) जो समाज के जातिगत कुंठा और ग़रीबी से त्रस्त है वो अपने नॉर्मल ब्रैन चाइल्ड को जीनियस बनाने पे तुला है |

तो दूसरा स्कैम्स है अंतरिक्ष में एलियन माइक्रोब्स (Alien microbes) की खोज कर रहे मशूहर स्पेस साइंटिस्ट डॉ. आचार्य (Nassar) का | जो खोज के बदले सरकार का कितना पैसा लगा रहा है | कहानी दोनों की एक जैसी है वो समाज मे झूठ के सहारे बढ़ रहे है | बस फ़र्क है तो दोनों की जाती और रुतबे मे | जहां डॉ. आचार्य एक ब्राह्मण है तो वही अय्यन मणि तमिलनाडु के दलित परिवार से है |

मुंबई मे एक कमरे की चोटी सी चॉल मे जीवन बसर करने वाला अय्यन मणि अपनी पत्नी (Indira Tiwari) के साथ रहता है। वो स्पेस साइंटिस्ट डॉ. आचार्य (Nassar) का पीए (PA) है। हर दिन बॉस की फटकार और तंगहाली में जीवन गुजर बसर करते हुए वो अपने बच्चे को अच्छा भविष्य देने का सपना पाल लेता है |

औसत ब्रैन वाला बच्चा आदि (Akshath das) अपने महत्वाकांक्षी पिता के इरादों पे कैसे खरा उतरेगा यही कहानी का झँझोड़ने वाला सच है | लेकिन हर हाल मे अय्यन अपने आदि जो की सिर्फ 6 साल का ही है उसे 'सीरियस मैन' बनाना चाहता है | 'सीरियस मैन' का यहा एलीट या संभ्रांत से है |

इसलिए वो आदि को बड़ी बड़ी बाते और वैज्ञानिक शब्दावली सिखाता है जिससे उसे समाज मे सब अलग नजर से देखे उसे सब लोग जीनियस समझे |धीरे- धीरे ऐसा होने भी लगता है आदि की पॉपुलरटी बढ़ने लगती है | अय्यन को समाज में रुतबा, शोहरत, पैसा सब कुछ हासिल होने लगता है लेकिन झूठ की बुनियाद मे कोई भी इमारत नहीं खड़ी होती |एक न एक दिन बोझ तले दब जाती है |

एक महत्वाकांक्षी पिता की जिद्द उसके बेटे आदि की बर्बादी का सबब बन जाती है और धीरे धीरे झूठ की कलाई खुलने लगती है | एक तरफ जहां आदि का राज़ फ़ाश होता है तो वही दूसरी तरफ डॉ. आचार्य की अंतरिक्ष में एलियन माइक्रोब्स की तलाश का झूठ अय्यन मणि के कारण से पकड़ा जाता है| 

आगे क्या होगा अय्यन मणि का? और क्या होगा उसके सपने का ?क्या होगा आदि का ? इन सवालों का जवाब आपको नेटफलिक्स की सीरियस मेन को देखने के बाद ही मिलेगा |


अभिनय

दक्षिण भारतीय के दलित पिता के किरदार मे नवाज़उद्दीन सिद्दीकी के साथ साथ उनके लड़के बने अक्षत दास और पत्नी बनी इंदिरा तिवारी का जबरदस्त अभिनय देखने को मिलेगा | जिनकी बदोंलत आप फिल्म के अंत तक बंधे रहेंगे |

खासकर नवाज़ की तारीफ करनी होगी दक्षिण भारतीय लहजे को उन्होंने अंत तक कायम रखा तो वही इंदिरा तिवारी को देख कर लगा ही नहीं की वो ऐक्टिंग कर रही है | उनके हाव-भाव अपने किरदार के मुताबिक ही थे |

यहा अगर अक्षत दास की तारीफ न की जाए तो नाइंसाफी होगी,फिल्म का सेंटर पॉइंट किरदार आदि को जिस खूबसूरती के साथ निभया वो देखते ही बनता है |एक सीन जो अंत से पहले आता है जहां जीनियस न बन पाने के बोझ के कारण उसके मासूम दिमाग पे असर पड़ता है | इस सीन मे नवाज़ और अक्षत के अभिनय से आपका समय वसूल हो जाएगा |  


क्या खास है सीरियस मेन मे ?

शिक्षा,ऊँच नीच जैसे सीरियस मुद्दे को निर्देशक सुधीर मिश्रा ने बड़ी बखूबी से सीरियस मेन फिल्म के जरिए दिखाया है | हालांकि इस कारण से फिल्म थोड़ी स्लो जरूर होती है और कई जगह उलझी हुई भी नजर आती है| लेकिन सभी ऐक्टरस का अभिनय आप को रोके रखता है |

संजीदा विषयों पर फिल्मो के साथ अक्सर ये दिककते आती है इसे नजर अंदाज किया जा सकता है |